प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने झूठे मुकदमों और फर्जी FIR दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि अब पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर किसी को झूठे केस में फंसाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी मामले की जांच में एफआईआर झूठी पाई जाती है, तो केवल केस खारिज कर देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि गलत सूचना देने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
झूठी FIR पर अब होगी सीधी कार्रवाई
अदालत ने स्पष्ट किया कि—
➡ झूठा केस दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई की जाएगी
➡ फर्जी और मनगढ़ंत FIR दर्ज कराना अब भारी पड़ेगा
➡ पुलिस तंत्र के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई
➡ जांच में FIR झूठी पाए जाने पर सूचना देने वाले के खिलाफ शिकायत दर्ज होगी
लिखित परिवाद होगा अनिवार्य
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अब गंभीर मामलों में मौखिक या अस्पष्ट शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं होगा। शिकायतकर्ता को लिखित परिवाद देना अनिवार्य होगा, ताकि बाद में जिम्मेदारी तय की जा सके। अदालत का मानना है कि झूठे मामलों के कारण न केवल निर्दोष लोग परेशान होते हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था और पुलिस संसाधनों पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है।
कानून का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं
हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून का गलत इस्तेमाल किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने पुलिस को भी संकेत दिए हैं कि वह बिना प्राथमिक जांच के एफआईआर दर्ज करने में सावधानी बरते और शिकायत की सत्यता की न्यूनतम पड़ताल अवश्य करे। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में एक सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है। इससे जहां निर्दोष लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं झूठे मुकदमों के जरिए बदले या दबाव की राजनीति करने वालों के लिए यह स्पष्ट चेतावनी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह रुख साफ करता है कि न्याय की प्रक्रिया को हथियार बनाने की इजाजत अब नहीं दी जाएगी।


