महिला को “कब्ज़े” में लेने की पुलिस की दलील पर कोर्ट नाराज, कहा—कब्ज़ा संपत्ति का होता है, इंसानों का नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा एक महिला को “कब्ज़े में लेने” की कार्रवाई को अवैध और अमानवीय बताया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने अपनी केस डायरी में यह दर्ज किया था कि महिला को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि केवल कब्ज़े में लिया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने साफ कहा कि—
“कब्ज़ा संपत्ति के लिए होता है, इंसानों के लिए नहीं।”
हाईकोर्ट ने पुलिस की इस मनमानी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को “कब्ज़े” में लेने जैसा शब्द और प्रक्रिया न सिर्फ अवैध है बल्कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है। यही नहीं, पुलिस ने इस संबंध में कब्ज़ा ज्ञापन भी तैयार किया था, जिसे अदालत ने गंभीर लापरवाही और गलत कानून-व्याख्या बताया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर के नई मंडी थाने के उपनिरीक्षक जय प्रकाश को मामले की पार्टी बनाया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा है।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी पुलिस प्रशासन पर बड़ा संदेश मानी जा रही है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लेना या गिरफ्तार दिखाने के बजाय “कब्ज़े” में दिखाना कानून के बिल्कुल खिलाफ है।


