प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाते हुए एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि झूठी एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि उनके गवाहों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा। साथ ही, यदि न्यायिक या पुलिस अधिकारी कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी करते पाए गए तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकलपीठ ने कहा कि जब विवेचना अधिकारी जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि कोई अपराध नहीं बनता, तो उसे केवल क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर देने से मुक्त नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में विवेचना अधिकारी को क्लोजर रिपोर्ट के साथ-साथ शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ लिखित शिकायत (कंप्लेंट फॉर्मेट) भी दाखिल करनी होगी। यह शिकायत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गलत सूचना देने के अपराध के लिए अनिवार्य होगी, ताकि अदालत विधिवत संज्ञान ले सके।
हाई कोर्ट ने साफ किया है कि यदि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो विवेचना अधिकारी, थाना प्रभारी, सर्किल ऑफिसर समेत अन्य पुलिस अधिकारी और संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट भी जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी की जा सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पुलिस महानिदेशक इस संबंध में अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी करें।
कोर्ट ने सभी न्यायिक मजिस्ट्रेटों और अदालतों को निर्देश दिया है कि यदि किसी मामले में कथित अभियुक्त के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है, तो पूरी केस डायरी मंगाई जाए और उसका गहन अवलोकन किया जाए। इसके बाद शिकायतकर्ता को विरोध याचिका दाखिल करने का अवसर दिया जाए। यदि सुनवाई के बाद यह प्रतीत होता है कि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है, तभी विधि अनुसार संज्ञान लिया जाए।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि सभी विवेचना अधिकारी, थाना प्रभारी, सर्किल अधिकारी और लोक अभियोजक इन निर्देशों का पालन करें। अंतिम रिपोर्ट या क्लोजर रिपोर्ट के साथ पुलिस द्वारा शिकायत के रूप में रिपोर्ट दाखिल करना अब अनिवार्य होगा।
यह मामला अलीगढ़ से जुड़ा है, जहां उम्मे फारवा ने अपने पूर्व पति महमूद आलम खान द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को झूठा बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन विरोध याचिका के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने समन जारी कर दिए थे। हाई कोर्ट ने उस आदेश को रद करते हुए मामले में नए सिरे से विधि अनुसार सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट के इस फैसले को झूठे मुकदमों पर लगाम लगाने और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


