लखनऊ| इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित 9149 नई अदालतों के गठन के मामले में राज्य सरकार से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट तलब की है। न्यायालय ने इस महत्वपूर्ण मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 जनवरी को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि अगली तारीख तक सरकार को यह बताना होगा कि अब तक कितनी प्रगति हुई है और आगे की कार्ययोजना क्या है।
बीते शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (वित्त) अपरिहार्य कारणों से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके थे। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया था कि प्रमुख सचिव विधि/विधि परामर्शी और अपर मुख्य सचिव वित्त अलग-अलग हलफनामे दाखिल कर अदालतों के गठन की अद्यतन स्थिति से न्यायालय को अवगत कराएं। कोर्ट का कहना था कि केवल नीतिगत निर्णय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर हुई वास्तविक प्रगति का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
यह मामला हाईकोर्ट द्वारा इसी वर्ष स्वयं संज्ञान लेकर दर्ज की गई जनहित याचिका से जुड़ा है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने इस प्रकरण में राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दिया था कि वह अपने पूर्व आदेशों के अनुपालन में अदालतों के गठन की स्थिति का पूरा ब्योरा पेश करे। कोर्ट ने माना कि प्रदेश में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने के लिए नई अदालतों का गठन अत्यंत आवश्यक है।
पिछली सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव विधि/विधि परामर्शी ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर बताया था कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में 9149 अदालतों के गठन को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया गया है। वहीं प्रमुख सचिव वित्त की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि पहले चरण में लगभग 900 अदालतों के गठन की प्रक्रिया प्रगति पर है और इसके लिए वित्तीय प्रबंध किए जा रहे हैं।
इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार और कोर्ट प्रशासन दोनों से अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामों में ताजा प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायालय का स्पष्ट संकेत है कि वह इस मामले में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई देखना चाहता है, ताकि प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिल सके और आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।






