अमृतपुर फर्रुखाबाद
तहसील क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में झोलाछाप डॉक्टर अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, वहीं दो दर्जन से अधिक पैथोलॉजी लैब बिना वैध अनुमति के चल रही हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर भी बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के अनुसार राजेपुर तिराहे और आसपास के इलाकों में कई ऐसे क्लीनिक संचालित हैं, जहां बिना किसी डिग्री और मान्यता के गंभीर उपचार किए जा रहे हैं। आरोप है कि इन क्लीनिकों में डिलीवरी और गर्भपात जैसे संवेदनशील कार्य भी नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विभागीय स्तर पर सांठगांठ के चलते ही यह पूरा खेल निर्बाध रूप से चल रहा है।
राजेपुर से सटे अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है, जहां बिना योग्यता के लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं और मनमाने तरीके से दवाएं दे रहे हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि आमजन के जीवन के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग कब तक आंखें मूंदे बैठा रहेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यह अवैध नेटवर्क फल-फूल रहा है, या फिर विभाग की उदासीनता इसका मुख्य कारण है?
क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी एवं उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अवैध क्लीनिकों, लैबों व मेडिकल स्टोर्स पर अंकुश लगाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।


