फर्रूखाबाद
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों के प्रधानों का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी महोदय ने किया और उन्होंने कहा कि टीबी (क्षय रोग) को जड़ से समाप्त करने में जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और आमजन से अपील की कि वे टीबी के प्रति जागरूकता फैलाएं, समय पर जांच कराएं और उपचार सुनिश्चित करें।
समारोह में जनपद की 03 वर्ष से अधिक समय से टीबी मुक्त 08 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को गोल्ड मेडल, 02 वर्ष से अधिक समय से टीबी मुक्त 68 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को सिल्वर मेडल और 01 वर्ष से अधिक समय से टीबी मुक्त 164 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को ब्रॉन्ज मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इन प्रधानों ने अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिलाधिकारी ने सभी सम्मानित प्रधानों के प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य ग्राम पंचायतों को उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया और कहा कि जनपद की सभी 580 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाना हमारा मुख्य लक्ष्य है।
इसके अतिरिक्त टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 23 निश्चय मित्रों को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। एडिशनल मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टीबी उन्मूलन के तहत चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि जिले में सक्रिय रूप से टीबी मरीजों की खोज, समय पर जांच और उपचार का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की भागीदारी और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के कारण जिले में टीबी के मामलों में कमी आ रही है।
कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने टीबी के प्रति जनजागरूकता फैलाने के लिए विशेष रूप से तैयार “निश्चय वाहन” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करेगा, समय पर जांच और उपचार की जानकारी देगा और टीबी मुक्त भारत अभियान को गति प्रदान करेगा।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, संबंधित विभागों के अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी, ग्राम प्रधान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजन ने टीबी उन्मूलन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और फर्रूखाबाद जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हुआ।


