बाल स्वास्थ्य पर बड़ा संकट
नई दिल्ली। भारत में बाल स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार देश में हर 1000 बच्चों में से 29 बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन भी नहीं देख पाते। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों के पोषण, देखभाल और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 6.4 लाख से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। इनमें अधिकांश मौतें ऐसी हैं जिन्हें समय रहते उचित इलाज, पोषण और देखभाल के जरिए रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की मौत के प्रमुख कारणों में कुपोषण, संक्रमण, समय से पहले जन्म, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव और आर्थिक कमजोरियां इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं।
सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, जैसे टीकाकरण अभियान, पोषण कार्यक्रम और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का पूरा लाभ सभी तक नहीं पहुंच पा रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान मां की सही देखभाल, बच्चों का समय पर टीकाकरण, संतुलित पोषण और साफ-सफाई पर ध्यान देकर इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और समाज को मिलकर काम करना होगा। जागरूकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और पोषण स्तर सुधारने से ही बच्चों की मौतों में कमी लाई जा सकती है।
यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि देश के भविष्य की चेतावनी हैं। समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि हर बच्चा सुरक्षित और स्वस्थ बचपन जी सके।


