अमेरिका की शर्तों को बताया अस्वीकार्य
तेहरान| पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। ईरान ने स्पष्ट शब्दों में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को खारिज करते हुए यह संकेत दे दिया है कि मौजूदा हालात में किसी भी बाहरी दबाव में बातचीत संभव नहीं है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा, जिससे क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। इस्लामाबाद का दावा था कि उसके दोनों देशों के साथ बेहतर संबंध हैं और वह संवाद की राह खोल सकता है, लेकिन ईरान ने इन प्रयासों को सिरे से नकार दिया। माना जा रहा है कि ईरान और पाकिस्तान के बीच गहरे अविश्वास के चलते तेहरान किसी भी वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
ईरान ने साथ ही अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तों को भी ‘अत्यधिक’ और ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी समझौते या वार्ता की संभावना बेहद कम है। ईरान का यह कड़ा रुख क्षेत्र में बढ़ते तनाव को और गहरा कर सकता है।
हालांकि, इस गतिरोध के बीच कतर के जरिए मध्यस्थता की संभावनाएं बनी हुई हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि ईरान कतर के माध्यम से बातचीत पर विचार कर सकता है, जिससे शांति वार्ता की एक नई राह खुल सकती है।
वहीं, दूसरी ओर जमीनी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ अपने जवाबी सैन्य अभियान की 93वीं लहर पूरी कर ली है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, इज़राइल के कई अहम सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। पश्चिमी गैलिली, हाइफा, काफर कन्ना और क्रायोट जैसे इलाकों में हमलों की बात कही गई है।
कुल मिलाकर, ईरान के इस सख्त रुख और पाकिस्तान की असफल कूटनीतिक पहल के चलते पश्चिम एशिया का संकट और गहराता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।


