इटावा
जनपद के ताखा तहसील क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में रविवार दोपहर मौसम ने अचानक ऐसा रुख बदला कि किसानों की पूरी मेहनत पल भर में मिट्टी में मिल गई। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और उसके साथ हुई जबरदस्त ओलावृष्टि ने करीब 20 मिनट तक ऐसा तांडव मचाया कि खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। इस प्राकृतिक आपदा से ताखा ब्लॉक के लगभग 20 गांवों में भारी नुकसान की खबर है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर बाद अचानक आसमान में काली घटाएं छा गईं और तेज हवाएं चलने लगीं। देखते ही देखते बारिश के साथ बेर के आकार के बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। ओलों की लगातार मार से खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं, जबकि जिन खेतों में फसल कटकर रखी थी, वहां दाना पूरी तरह झड़ गया। कई किसानों ने बताया कि इस समय फसल पककर तैयार थी और कटाई का कार्य भी चल रहा था, ऐसे में यह ओलावृष्टि उनके लिए किसी आपदा से कम नहीं है।
ओलों की तेज बौछार देख किसान अपनी आंखों के सामने सालभर की मेहनत को बर्बाद होते हुए देखते रह गए। कई जगहों पर खेतों में पानी भर गया, जिससे बची-खुची फसल भी खराब होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की मार ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है और अब उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस ओलावृष्टि के कारण अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए, जबकि खेतों में काम कर रहे किसान और मजदूर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। घटना के बाद प्रभावित गांवों में मायूसी छा गई है और हर तरफ नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
किसानों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरकार की ओर से समय रहते मदद नहीं मिली तो उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि टीमों को भेजकर नुकसान का जायजा लिया जा रहा है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर किसानों की उस बेबसी को उजागर करती है, जहां उनकी मेहनत पूरी तरह प्रकृति के भरोसे होती है और एक झटके में सब कुछ तबाह हो जाता है।


