शमशाबाद, फर्रुखाबाद।
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने शमशाबाद क्षेत्र के गांव बांसखेड़ा में तबाही मचा दी है। लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने भयावह हैं कि अब खेत-खलिहानों के साथ-साथ लोगों के घर-मकान भी गंगा की धारा में समाने लगे हैं। गांव में दहशत और मायूसी का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों के अनुसार, गंगा में जलस्तर बढ़ने के बाद से ही कटान तेज हो गया है। उपजाऊ कृषि भूमि तेजी से नदी में समा रही है। इस समय किसानों के खेतों में गेहूं, तंबाकू व अन्य फसलें खड़ी हैं, लेकिन वे भी कटान की चपेट में आकर बर्बाद हो रही हैं। कई किसानों की महीनों की मेहनत देखते ही देखते गंगा में विलीन हो रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कटान अब गांव के बेहद करीब पहुंच चुका है। कई कच्चे मकान और झोपड़ियां ध्वस्त हो चुकी हैं, जबकि अन्य घर भी खतरे की जद में हैं। अपने आशियानों को टूटते देख ग्रामीण पूरी तरह टूट चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से लगातार कटान जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस बचाव कार्य नहीं किया गया। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो पूरा गांव गंगा में समा सकता है।
ग्राम प्रधान जुबेर खां ने बताया कि गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे खतरे वाले स्थानों से तुरंत हट जाएं, क्योंकि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
कटान के भय से कई ग्रामीण—जैसे मशकीरन, मशरूम खां, शकील खां, इबनिश आदि—अपने परिवारों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। वहीं, अन्य लोग भी अपने घर छोड़ने की तैयारी में जुटे हैं। कई परिवार खुले आसमान के नीचे या पॉलिथीन के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों की आंखों के सामने उनकी जमीन, फसलें और आशियाने बर्बाद हो रहे हैं, जिससे वे गहरे सदमे में हैं। लोगों का कहना है कि जब व्यवस्थाएं बिगड़ जाती हैं, तो उन्हें सुधारने में काफी समय लग जाता है, लेकिन प्रशासन की सुस्ती हालात को और बिगाड़ रही है।
गांव में लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटान रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास की मांग की है। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
गंगा के कटान से बांसखेड़ा में हाहाकार, घर-खेत निगल रही धारा, दहशत में पलायन को मजबूर ग्रामीण


