गांधीनगर: गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Gujarat Cyber Police) ने एक बड़े अभियान में फर्जी खातों पर आधारित साइबर धोखाधड़ी (based cyber fraud) करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इसे लगभग 930 करोड़ रुपये के राष्ट्रव्यापी घोटाले के रूप में गिना जा रहा है। जांच में पता चला है कि गिर सोमनाथ जिले के वेरावल-सोमनाथ क्षेत्र से संचालित यह गिरोह देश भर में साइबर अपराधों में सीधे तौर पर शामिल था।
साइबर अपराध पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने 28 राज्यों में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया और भोले-भाले पीड़ितों से लगभग 930 करोड़ रुपये की रकम हड़प ली। अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अब्दुल ऋषि पनवाला (गिर सोमनाथ), मुश्ताक अब्दुल खालिद खानानी (वेरावल, गिर सोमनाथ), शब्बीर मोहम्मद हनीफ भाडेला (मुंबई-ठाणे), मोहम्मद ताहा शब्बीर भाडेला (मुंबई-ठाणे) और गगजीभाई मंजीभाई राजपूत (अहमदाबाद) के रूप में हुई है।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने इंडसइंड बैंक में कई फर्जी खाते खोले थे। इनमें 26 बचत खाते और 54 चालू खाते शामिल थे, जिनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। बताया जाता है कि गिरोह ने विदेशी मुद्रा कार्डों का उपयोग करके धनराशि निकाली, जिनमें से प्रत्येक कार्ड की लेनदेन सीमा लगभग 7 लाख रुपये थी।
जांचकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि आरोपी ने दुबई की 25 से 30 बार यात्रा की थी, जहां उसने उन्हीं विदेशी मुद्रा कार्डों का उपयोग करके बड़ी मात्रा में धन निकाला था। इससे धोखाधड़ी से जुड़े एक संगठित अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का संकेत मिलता है। जांच में पता चला कि मुश्ताक खानानी ने पूरे ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। भारत भर में साइबर धोखाधड़ी से जुटाई गई रकम वह मुंबई स्थित अपने एक प्रमुख हैंडलर को भेजता था, जहां से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का प्रबंधन किया जाता था। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण से यह भी पता चला है कि यह गिरोह देश भर में लगभग 1,534 साइबर अपराध मामलों से जुड़ा हुआ था।
अब तक चल रही जांच के तहत 264 साइबर अपराध मामलों को सफलतापूर्वक सुलझाया जा चुका है, जिसे अधिकारियों ने एक बड़ी सफलता बताया है। इस ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए साइबर क्राइम एसपी राजदीप सिंह झाला ने कहा, “म्यूल अकाउंट और फॉरेक्स कार्ड के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इस साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हर लिंक का पता लगाने के लिए जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।”
साइबर अपराध विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, डेबिट या क्रेडिट कार्ड या व्यक्तिगत दस्तावेज़ किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अपने खाते को किसी अन्य माध्यम से साझा करना भी एक आपराधिक अपराध है और इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


