लखनऊ| करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के बड़े मामले में सेंट्रल जीएसटी विभाग के एक इंस्पेक्टर की संलिप्तता सामने आने से प्रशासनिक और कर विभाग में हड़कंप मच गया है। दिल्ली में तैनात सेंट्रल जीएसटी इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल को अब इस मामले में गाजियाबाद में दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाया गया है। एसटीएफ उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है।
इस मामले में एसटीएफ ने शुक्रवार को दिल्ली निवासी स्क्रैप कारोबारी हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस, जितेंद्र झा, पुनीत अग्रवाल और शिवम सिंह को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने बोगस फर्मों और फर्जी ई-वे बिल तथा इनवॉयस के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये की कर चोरी को अंजाम दिया। इस संबंध में गाजियाबाद के कवि नगर थाना क्षेत्र में केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद एसटीएफ लखनऊ की टीम पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है।
तफ्तीश के दौरान यह बड़ा खुलासा हुआ कि इस संगठित गिरोह को विभागीय स्तर पर भी संरक्षण मिल रहा था। जांच में सामने आया कि दिल्ली में सेंट्रल जीएसटी विभाग में तैनात इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल सक्रिय रूप से इस गिरोह का हिस्सा था। एसटीएफ ने उसके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य जुटाए हैं, जिसके आधार पर उसे भी नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा हरियाणा निवासी आलोक नामक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जो एकमुश्त कमीशन पर फर्जी फर्में तैयार कर हरदीप सिंह को उपलब्ध कराता था।
एसटीएफ के अनुसार, आरोपी पुनीत अग्रवाल की ‘एडॉन ऑटोमोबाइल’ नामक फर्म भी पूरी तरह बोगस थी, जिसके जरिए करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया। करीब तीन महीने पहले इस फर्म को विभाग द्वारा सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद पुनीत अग्रवाल ने सेंट्रल जीएसटी इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल के माध्यम से इस फर्म को दोबारा रिस्टोर करवा लिया। इसके बदले इंस्पेक्टर को 40 हजार रुपये की रिश्वत दी गई थी। जांच एजेंसी को आशंका है कि इसी तरह कई अन्य फर्मों को भी अवैध रूप से बहाल कराकर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कराई गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने गिरोह को विभागीय स्तर पर लगातार मदद पहुंचाई, जिससे आरोपी लंबे समय तक बिना किसी रोकटोक के फर्जीवाड़ा करते रहे। इसके बदले में उसने लाखों रुपये की अवैध वसूली की। एसटीएफ को संदेह है कि इंस्पेक्टर ने सैकड़ों फर्मों में इसी तरह का खेल किया है। इस पूरे मामले में एसटीएफ ने पुनीत अग्रवाल के मोबाइल फोन से अहम व्हाट्सएप चैट भी रिकवर की है, जिसमें पुनीत और इंस्पेक्टर के बीच लेनदेन, फर्म बहाली और फर्जीवाड़े से जुड़ी बातचीत के स्पष्ट सबूत मिले हैं।
सीओ एसटीएफ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि जांच में इंस्पेक्टर की भूमिका पूरी तरह सामने आ चुकी है और वह गिरोह का सक्रिय सदस्य पाया गया है। इसी कारण उसे आरोपी बनाया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं। एसटीएफ का दावा है कि आने वाले दिनों में इस बड़े जीएसटी घोटाले से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।






