लखनऊ: हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद (Major Dhyanchand) को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय सचिव Anupam Mishra ने आज शहीद स्मारक पर दीप प्रज्वलित कर सरकार से अपनी मांग रखी।
अनुपम मिश्रा ने कहा कि नीरज चोपड़ा को ओलंपिक स्वर्ण पदक पर देश ने सिर आंखों पर बिठाया, परंतु तीन-तीन ओलंपिक स्वर्ण भारत को दिलाने वाले मेजर ध्यानचंद आज भी उचित सम्मान से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि ध्यानचंद ने अपनी हॉकी से भारत का नाम विश्व पटल पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित कराया। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में तो हिटलर भी उनके खेल से प्रभावित होकर उन्हें जर्मनी की ओर से खेलने का प्रस्ताव देने पर विवश हो गया था।
मिश्रा ने कहा कि जैसे फुटबॉल में पेले और क्रिकेट में डॉन ब्रैडमैन का नाम अमर है, वैसे ही हॉकी में ध्यानचंद का नाम है। उन्हें 1956 में पद्म भूषण मिला, पर उनका योगदान इससे कहीं अधिक बड़ा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनेताओं को तो मृत्यु के एक-दो वर्षों में भारत रत्न मिल जाता है, जबकि ध्यानचंद अब भी उपेक्षित हैं।
राष्ट्रीय लोक दल का मानना है कि मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न प्रदान कर ही देश उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकता है। इससे न केवल हॉकी का गौरव लौटेगा, बल्कि भारत रत्न की गरिमा भी बढ़ेगी।