नई दिल्ली: सरकार (Government) ने बुधवार को कहा कि भारत ने पान मसाला (pan masala) के लिए लेबलिंग मानदंडों को कड़ा कर दिया है। इसके तहत निर्माताओं को अगले साल से हर पैक के आकार पर खुदरा मूल्य और अन्य अनिवार्य घोषणाएँ छापनी होंगी। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज़) द्वितीय (संशोधन) नियम, 2025 को अधिसूचित किया है, जिससे व्यापक रूप से उपभोग किए जाने वाले इस चबाने योग्य उत्पाद के छोटे पैकेटों के लिए लंबे समय से चली आ रही छूट समाप्त हो गई है।
सरकार द्वारा जारी संशोधित नियम 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी होंगे। उस तिथि से, सभी निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को सख्त लेबलिंग आवश्यकताओं का पालन करना होगा। इन परिवर्तनों के साथ, 10 ग्राम या उससे कम के पान मसाला पैकेट, जिन्हें पहले खुदरा बिक्री मूल्य (आरएसपी) छापने से छूट दी गई थी, अब विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज़) नियम, 2011 के तहत अनिवार्य सभी घोषणाओं के साथ मूल्य प्रदर्शित करना होगा।
सरकार ने नियम 26(ए) के उस प्रावधान को भी वापस ले लिया है जिसके तहत छोटे पैक पर कुछ घोषणाओं को छोड़ा जा सकता था। इसकी जगह पान मसाला के लिए एक नया प्रावधान जोड़ा गया है। अधिकारियों ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य इस क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाकर उपभोक्ता संरक्षण को मज़बूत करना है, जहाँ छोटे पैक व्यापक रूप से असंगत या अस्पष्ट कीमतों पर बेचे जाते हैं।
इस कदम से कराधान को और भी सटीक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अनिवार्य आरएसपी लेबलिंग, पान मसाला के लिए आरएसपी-आधारित जीएसटी शुल्क पर वस्तु एवं सेवा कर परिषद के निर्णयों को लागू करने में मदद करेगी, जिससे सबसे छोटी इकाइयों सहित सभी पैक आकारों में सुचारू प्रवर्तन, उचित मूल्यांकन और बेहतर राजस्व संग्रह संभव होगा। पान मसाला उद्योग, जिसमें ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड दोनों उत्पाद शामिल हैं, हाल के वर्षों में अस्पष्ट मूल्य निर्धारण और कर चोरी के लिए जांच के दायरे में रहा है। नियम लागू होने से पहले निर्माताओं के पास पैकेजिंग प्रणालियों को समायोजित करने के लिए एक वर्ष का समय होगा।


