डिप्टी कमिश्नर की जमानत अर्जी खारिज, एंटी करप्शन कोर्ट का सख्त रुख
झांसी। चर्चित CGST घूसकांड में आरोपी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को बड़ा झटका लगा है। एंटी करप्शन के विशेष न्यायाधीश ने उनकी जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
प्रकरण में आरोप है कि CGST विभाग के अधिकारियों ने कुछ फर्मों को कर में अनुचित छूट देने के बदले भारी रिश्वत ली। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे घूसकांड में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिस पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
इस मामले में पहले ही 70 लाख रुपये की रिश्वत के साथ एक अधीक्षक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा अनिल तिवारी और अजय शर्मा समेत अन्य आरोपी भी इस घूसकांड में पकड़े गए थे। जांच में विभागीय मिलीभगत और संगठित तरीके से रिश्वत वसूली के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
लखनऊ जेल में बंद हैं आरोपी
फिलहाल घूसखोरी के इस मामले में कुल पांच आरोपी लखनऊ जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से अधिकारी या बिचौलिए शामिल रहे हैं।
अदालत के इस फैसले के बाद CGST घूसकांड को लेकर प्रशासनिक और विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है, वहीं आने वाले दिनों में और भी खुलासों की संभावना जताई जा रही है।






