– 40 दिन का अल्टीमेटम, राज्य माता घोषित हों गौमाता
– नहीं तो संत करेंगे आंदोलन
– मुख्यमंत्री योगी को किया चैलेंज, बोले अब दिल्ली नहीं लखनऊ से होगा आंदोलन का आवाज

वाराणसी। ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 ने शुक्रवार अपने आश्रम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान साधु-संतों के साथ बदसलूकी और अपमान किया गया, जो हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है।
‘हम पर पुलिस से लाठियां चलवाई गईं’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शांतिपूर्ण संत समाज पर पुलिस से लाठियां चलवाईं। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान के भी खिलाफ है।
उन्होंने सरकार से स्पष्ट मांग करते हुए कहा कि गौ माता को राज्य माता घोषित किया जाए। शंकराचार्य ने कहा कि गाय हिंदू संस्कृति और आस्था का केंद्र है, इसके बावजूद आज भी गोहत्या पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लगाई गई, यह बड़ा सवाल है। गौ माता के लिए आंदोलन दिल्ली से नहीं लखनऊ से होगा अब हम लखनऊ से बैठकर आवाज बुलंद करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गौ माता के लिए फैसला लेना होगा।
अपने बयान में शंकराचार्य ने कहा
“हिंदू होने की पहली शर्त गो-रक्षक होना है। अगर आप यह नहीं करते, तो आप पाखंडी हैं।”
उन्होंने कहा कि केवल हिंदू होने का दावा करना पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यवहार और आचरण से भी इसे साबित करना होगा।
सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को 40 दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में यह प्रमाणित किया जाए कि शासन वास्तव में हिंदू समाज और गौ रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो संत समाज बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा।
धार्मिक अस्मिता से जुड़ा मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि यह मामला केवल साधु-संतों का नहीं, बल्कि हिंदू अस्मिता और सम्मान से जुड़ा है। प्रशासन को चाहिए कि वह संत समाज से संवाद करे, न कि बल प्रयोग का रास्ता अपनाए।
फिलहाल प्रशासन या सरकार की ओर से शंकराचार्य के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संत समाज की ओर से आगे की रणनीति जल्द घोषित किए जाने की संभावना है।

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