लखनऊ। राजधानी में एलपीजी गैस की किल्लत अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों की रोज़ी-रोटी पर पड़ने लगा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि मजदूरों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
शहर के विभिन्न लेबर अड्डों पर हर सुबह बड़ी संख्या में मजदूर काम की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अधिकतर को निराशा ही हाथ लग रही है। कई मजदूर रोज आते हैं और घंटों इंतजार के बाद बिना काम के ही वापस लौट जाते हैं। काम न मिलने से उनके चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है।
होटल और ढाबों में काम ठप, मजदूरी के अवसर घटे
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और ढाबा कारोबार पर पड़ा है। रसोई गैस न मिलने के कारण कई छोटे-बड़े होटल बंद पड़े हैं या सीमित रूप से चल रहे हैं। इसका सीधा असर वहां काम करने वाले कुक, हेल्पर और अन्य मजदूरों पर पड़ा है, जिनकी रोज़ की कमाई लगभग खत्म हो गई है।
एक-एक दिन काटना हुआ मुश्किल
दिहाड़ी मजदूरों के लिए हर दिन कमाना और उसी से घर चलाना जरूरी होता है। ऐसे में लगातार काम न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। कई मजदूरों का कहना है कि अब परिवार का पेट भरना भी मुश्किल हो गया है और उधार लेकर गुजारा करना पड़ रहा है।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी चिंता
स्थिति गंभीर होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। न तो गैस सप्लाई को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जा रही है और न ही मजदूरों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
गैस किल्लत का असर: दिहाड़ी मजदूरों पर टूटा रोज़गार का संकट


