फर्रुखाबाद। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक व्यवस्था लागू कर दी है। आने वाले माघ माह के प्रसिद्ध पांचाल घाट रामनगरिया मेले से पूर्व यह व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि कल्पवास और प्रमुख पर्वों पर स्नान करने आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित व सुचारू सुविधाएं मिल सकें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब घाटों पर कार्यरत सभी दुकानदारों, नाविकों और गंगा पुत्रों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी घाट पर काम नहीं कर सकेगा। पंजीकृत लोगों को पहचान पत्र (आईकार्ड) जारी किए जाएंगे, जिन्हें हर समय साथ रखना होगा।
वन विभाग की देखरेख में यह अभियान विशेष रूप से पांचाल घाट और ढाईघाट पर चलाया जाएगा।
नाविकों पर कड़ा नियंत्रण
नई व्यवस्था के तहत लाइफ जैकेट के बिना कोई भी नाव नहीं चलेगी। साथ ही क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर रोक रहेगी। नावों पर स्पष्ट रूप से नाविक का नाम, पता और पंजीकरण नंबर अंकित करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का साफ संदेश है कि अब नाबालिग नाव संचालन नहीं कर सकेंगे, और यह नियम पूरी सख्ती से लागू कराया जाएगा।
दुकानदारों के लिए सख्त दिशानिर्देश
प्रत्येक दुकान पर दुकानदार का नाम, पिता का नाम, पंजीकरण संख्या और मोबाइल नंबर बड़े अक्षरों में लिखना अनिवार्य होगा। इससे किसी आपात स्थिति में दुकानदार की पहचान और संपर्क में आसानी होगी।
वन विभाग ने साफ कहा है कि घाटों पर चल रही दुकानों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी, और अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के पास नहीं था रिकॉर्ड
वर्तमान में गंगा किनारे काम करने वाले दुकानदारों, नाविकों और गंगा पुत्रों का प्रशासन के पास कोई ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। जिसके चलते कई बार विवाद और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां सामने आती थीं। इसी कमी को दूर करने के लिए यह व्यवस्थित पंजीकरण अभियान शुरू किया गया है।
आपातकालीन सेवाओं के नंबर भी प्रदर्शित होंगे
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनज़र घाटों के आसपास ग्राम प्रधानों, पुलिस, बिजली विभाग, सफाई विभाग, अग्निशमन और एंबुलेंस के मोबाइल नंबर बोर्ड पर प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
“नियमों का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई होगी” – डीएफओ
प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) राजीव कुमार ने बताया कि ढाईघाट और पांचाल घाटों पर इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए संबंधित उप-जिलाधिकारी (SDM) की देखरेख में विशेष अभियान चलाया जाएगा। पंजीकरण शुल्क तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और यह राशि ग्रामसभा के खाते में जमा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि विभाग इस व्यवस्था को पूरी सख्ती के साथ लागू कराएगा और घाटों की स्वच्छता व सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
माघ मेले से पहले लागू की जा रही यह नई व्यवस्था गंगा घाटों पर बेहतर प्रबंधन, सुरक्षित नाव संचालन और साफ-सुथरे वातावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





