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Tuesday, April 7, 2026

‘गंगा की गोद’ में अनाज पर डाका!

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कटरी के गेहूं कटाई को लेकर बवाल
– विधायक पति और एसडीएम आमने-सामने, भारी पुलिस बल तैनात
– करोड़ों की जमीन को लेकर कुछ दिन पूर्व भी एसडीएम से हो चुकी विधायक सुरभि की भिड़ंत
– पूर्व के कई एसडीएम भी हो चुके विधायक और उनके पति के गुस्से के शिकार
फर्रुखाबाद। जनपद के कायमगंज क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बोई गई गेहूं की फसल को काटने को लेकर सोमवार देर रात ऐसा बवाल मचा, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधि तंत्र के टकराव को खुलकर सामने ला दिया। ‘गंगा’ के नाम दर्ज सरकारी जमीन पर खड़ी फसल को जबरन काटने की कोशिश को प्रशासन ने सीधा-सीधा “सरकारी संपत्ति पर डाका” करार दिया है।
मामला शमसाबाद क्षेत्र के नगला बसोला गांव का है, जहां करीब 100 बीघा भूमि सरकारी अभिलेखों में ‘गंगा’ के नाम दर्ज है। आरोप है कि इस पवित्र और संरक्षित भूमि पर पहले अवैध कब्जा कर गेहूं की बुवाई की गई और फिर प्रशासन के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद कटाई का दुस्साहस किया गया।
सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने पर प्रशासन ने पहले ही जांच कर इस जमीन पर किसी भी प्रकार की कटाई पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं, खड़ी फसल को सुरक्षित रखने के लिए उसे कोटेदार की निगरानी में सौंप दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद सोमवार देर रात सत्ता के प्रभाव का खुला प्रदर्शन देखने को मिला।
क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुरभि के पति डॉ. अजीत गंगवार दो कंबाइन मशीनों के साथ मौके पर पहुंचे और फसल कटवाना शुरू करा दिया। यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक आदेशों की खुली अवहेलना थी, बल्कि सरकारी जमीन पर कब्जे की पुष्टि भी करती नजर आई।
सूचना मिलते ही कायमगंज के एसडीएम अतुल कुमार सिंह राजस्व टीम और कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और तत्काल कटाई रुकवाई। इसी दौरान एसडीएम और विधायक पति के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। हालात इतने बिगड़े कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार द्विवेदी भी मौके पर पहुंचे और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि वर्ष 2023 में ही इस भूमि से जुड़े सभी पट्टे निरस्त किए जा चुके हैं और यह पूरी तरह सरकारी संपत्ति है। ऐसे में इस पर की गई खेती और कटाई दोनों ही अवैध हैं।
एसडीएम अतुल कुमार सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन द्वारा पहले ही स्पष्ट रोक लगाई जा चुकी थी, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कटाई का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना केवल एक विवाद नहीं, बल्कि उस प्रवृत्ति का उदाहरण है जिसमें प्रभाव और दबाव के दम पर सरकारी जमीनों को हड़पने की कोशिश की जाती है। “गंगा” के नाम दर्ज भूमि पर इस तरह का अतिक्रमण और फिर उस पर उगे अनाज की कटाई—यह सीधे तौर पर सार्वजनिक संपत्ति की लूट जैसा मामला प्रतीत होता है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विधायक परिवार और प्रशासन आमने-सामने आए हों। इससे पहले भी कंपिल क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर विवाद हो चुका है। वहीं हाल ही में समाधान दिवस के दौरान भी विधायक और एसडीएम के बीच तीखी बहस सामने आई थी।
अब सवाल यह है कि क्या सरकारी जमीनों पर इस तरह कब्जा कर फसल उगाना और फिर उसे काटने की कोशिश करना “सिस्टम की कमजोरी” नहीं, बल्कि “सिस्टम को चुनौती” है? और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगा सकती है?
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने फर्रुखाबाद में प्रशासन बनाम प्रभावशाली लोगों के टकराव को एक बार फिर उजागर कर दिया है जहां एक तरफ कानून है, तो दूसरी तरफ उसे चुनौती देने की खुली कोशिश।

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