अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से विशेष मुलाकात, भारत की शांति नीति की गूंज विश्व मंच पर
संवाददाता, लखनऊ/नई दिल्ली/गाज़ा:
गाज़ा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय शांति शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका इस बार बेहद अहम रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष प्रतिनिधि और विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया ने भारत की ओर से इस सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के सामने भारत की “वसुधैव कुटुंबकम” की नीति को सशक्त स्वर में रखा।
सम्मेलन के दौरान राजा भैया की भेंट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई। दोनों नेताओं के बीच गाज़ा संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान, मानवीय सहायता और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर लंबी चर्चा हुई। ट्रंप ने भारतीय प्रतिनिधि के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर शांति और संतुलन की आवाज़ बन चुका है। राजा भैया ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश दोहराते हुए कहा कि भारत का सदैव मानना रहा है कि हर संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के रास्ते से ही निकल सकता है।
राजा भैया ने सम्मेलन के मंच से कहा, “भारत आज दुनिया के हर कोने में यह संदेश लेकर आया है कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं, और निर्दोष नागरिकों का खून बहाकर कोई उद्देश्य पूरा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भारत की ओर से गाज़ा क्षेत्र में मानवीय सहायता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग देने की पेशकश की।
गाज़ा सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने भारत की शांतिपूर्ण पहल की सराहना की। सम्मेलन के अंत में भारत का प्रस्ताव “संवाद से समाधान, हिंसा का अंत और मानवता की रक्षा” दस्तावेज़ के रूप में पारित किया गया।
राजा भैया की इस यात्रा को कूटनीतिक हलकों में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, मोदी सरकार की संतुलित कूटनीति और मानवीय दृष्टिकोण के चलते भारत अब न केवल दक्षिण एशिया बल्कि वैश्विक शांति का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।





