शरद कटियार
उत्तर प्रदेश में शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ने की जो पहल अब तेज़ी से आकार ले रही है, वह केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक मजबूत नींव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू किया गया “प्रोजेक्ट प्रवीण” इसी सोच का प्रतीक है, जहां शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बन चुकी है।
प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में इस परियोजना का विस्तार यह संकेत देता है कि सरकार अब पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए गंभीर है। 3447 विद्यार्थियों को आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देना केवल कौशल विकास नहीं, बल्कि भविष्य के भारत के लिए तैयार करना है। यह वही क्षेत्र हैं, जो आने वाले वर्षों में रोजगार के सबसे बड़े स्रोत बनने वाले हैं।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि अटल आवासीय विद्यालय उन वर्गों के बच्चों के लिए हैं, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित रहे हैं। श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और कमजोर तबके के बच्चों को जब निःशुल्क आवासीय शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा, तो यह उनके जीवन की दिशा ही बदल देगा। यह पहल केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि अवसरों का लोकतंत्रीकरण है।
“स्कूल से स्किल” की अवधारणा भारत जैसे देश में अत्यंत प्रासंगिक है, जहां लंबे समय तक शिक्षा और रोजगार के बीच एक बड़ा अंतराल रहा है। डिग्री तो मिलती थी, लेकिन कौशल की कमी के कारण रोजगार नहीं। “प्रोजेक्ट प्रवीण” इसी खाई को पाटने का प्रयास है। 210 घंटे का संरचित प्रशिक्षण, जिसमें सॉफ्ट स्किल्स, इंडस्ट्रियल विजिट और अब ‘AI for All’ जैसे मॉड्यूल शामिल किए गए हैं, यह दर्शाता है कि सरकार भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बना रही है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर किए गए सर्वे के आधार पर विद्यार्थियों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार करना भी इस योजना की एक बड़ी विशेषता है। यह “वन-साइज-फिट्स-ऑल” मॉडल नहीं, बल्कि छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण है, जो उन्हें उनके रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देता है।
यह भी समझना जरूरी है कि आज की दुनिया में तकनीक तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल सेवाएं और हेल्थ टेक जैसे क्षेत्र भविष्य के रोजगार की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में यदि स्कूल स्तर पर ही इन क्षेत्रों की समझ विकसित की जाए, तो छात्र न केवल नौकरी के लिए तैयार होंगे, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे।
हालांकि, किसी भी योजना की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। जरूरी है कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों की दक्षता और उद्योग से जुड़ाव को सुनिश्चित किया जाए। केवल सर्टिफिकेट देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्यार्थी वास्तव में उस कौशल को सीखें और उसका उपयोग कर सकें।
कुल मिलाकर, “प्रोजेक्ट प्रवीण” उत्तर प्रदेश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह न केवल शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगा। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
अब समय आ गया है कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ा जाए, और “प्रोजेक्ट प्रवीण” इस दिशा में एक मजबूत कदम है—जहां स्कूल से निकलने वाला हर छात्र केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार नागरिक होगा।


