– SIR, बुलडोजर कार्रवाई, लोक सेवा आयोग, प्रदूषण और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर एक के बाद एक गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में कोडीन सिरप (codeine syrup) घोटाले को लेकर चिंता है और यह घोटाला सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से संचालित हो रहा था, जिसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है।
अखिलेश यादव ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि “कोई छोटी घटना हो जाए तो बुलडोजर चल जाता है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री जी के खिलौना बुलडोजर का ड्राइवर ही भाग गया है।” सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अब तक 24 लोगों पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है, जिनमें से 22 लोग PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग से हैं। उन्होंने इसे चयनात्मक कार्रवाई बताते हुए कहा कि सरकार कानून के नाम पर सामाजिक वर्गों को निशाना बना रही है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अखिलेश यादव ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जहां-जहां जा रहे हैं, वहां अधिकारियों पर दबाव डालकर “समाजवादियों का वोट काटने” के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने गणितीय उदाहरण देते हुए कहा“अगर 4 करोड़ वोट 403 विधानसभाओं में बांट दिए जाएं तो बीजेपी का औसतन 84 हजार वोट कटेगा और हमें 40 हजार वोट से जीत मिलेगी।”
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां जो घोटाले हो रहे हैं, उनका अंदाजा भी आम लोग नहीं लगा सकते। उन्होंने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया। राजधानी लखनऊ में बढ़ते प्रदूषण पर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि प्रदूषण की वजह से क्रिकेट मैच तक नहीं हो सका। साथ ही नदियों की हालत पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी के लोग मिले हुए हैं। उन्होंने SIR से जुड़े एक ऐप पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह ऐप उसी कंपनी का है जिसने बीजेपी को सबसे ज्यादा चंदा दिया है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। सपा अध्यक्ष के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष पर इन आरोपों का जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।


