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Sunday, February 15, 2026

थर्ड हैंड साइकिल से मल्टीनेशनल पहचान तक: 42 वर्षीय सौरभ गुप्ता ने लिखी सफलता की नई इबारत

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लखनऊ /रायबरेली: कभी थर्ड हैंड साइकिल (third-hand bicycle)  से सफर करने वाले युवा ने आज सफलता के ऐसे आयाम छू लिए हैं कि उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। 42 वर्षीय सौरभ गुप्ता ने संघर्षों के बीच अपने सपनों को आकार दिया और आज वे लाइफ वन वैलनेस प्राइवेट लिमिटेड (Life One Wellness Private Limitedके माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।

रायबरेली की साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले सौरभ गुप्ता के पास शुरुआत में संसाधन सीमित थे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे स्तर पर की, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ने उन्हें आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने हेल्थ सेक्टर में संभावनाएं तलाशीं और एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया।

कंपनी सूत्रों के अनुसार,करीब 20 हजार से अधिक सक्रिय सहयोगी नेटवर्क से जुड़े हैं।प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों को आय के अवसर मिल रहे हैं।उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों में वितरण व्यवस्था स्थापित की गई है।सौरभ गुप्ता को कंपनी में एम डी (लीडरशिप डेवलपमेंट हेड) के रूप में देखा जाता है और सहयोगी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं।

कंपनी हेल्थ से जुड़े विभिन्न उत्पाद बनाती है। प्रचार सामग्री के अनुसार, इनके उत्पाद निम्न स्वास्थ्य क्षेत्रों में उपयोग के लिए तैयार किए जाते हैं शुगर (डायबिटीज) सपोर्ट,

हाई ब्लड प्रेशर सपोर्ट,हार्ट, लिवर और किडनी हेल्थ हार्मोनल बैलेंस,बवासीर (पाइल्स) सपोर्ट जबरदस्त है।

कंपनी का दावा है कि इन उत्पादों ने कई उपभोक्ताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

रोस्टेड मसालों का बढ़ता बाजार

हेल्थ सेगमेंट के साथ कंपनी ने रोस्टेड मसालों के क्षेत्र में भी कदम रखा है। नियंत्रित रोस्टिंग तकनीक के माध्यम से स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने का दावा किया जाता है। बाजार में इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने की बात कही जा रही है।

कंपनी का अल्कलाइज़र 5.0 स्टील वाटर जग भी उपभोक्ताओं के बीच चर्चा में है। दावा किया जाता है कि यह पानी के पी एच और ओआरपी स्तर में सुधार करता है। स्टेनलेस स्टील डिजाइन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग बढ़ रही है।

सामाजिक प्रभाव और युवा प्रेरणा

सौरभ गुप्ता की सफलता की कहानी युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। उनका मानना है कि “बड़ा सोचो, निरंतर सीखो और टीम के साथ आगे बढ़ो” यही सफलता का मूल मंत्र है।

आज रायबरेली से शुरू हुई यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। संघर्ष से सफलता तक की यह यात्रा न केवल एक उद्यमी की कहानी है, बल्कि हजारों परिवारों की आशा और आत्मनिर्भरता की दास्तान भी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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