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Wednesday, January 14, 2026

वाराणसी में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की पेशी, सुरक्षा में भारी चूक

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– एक्सपायर बीमा व फिटनेस वाली प्रिजन वैन से 450 किमी का जोखिमभरा सफर

वाराणसी: वाराणसी (Varanasi) में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर (Former IPS Amitabh Thakur) की पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। बी-वारंट पर पेशी के लिए देवरिया से वाराणसी लाए गए पूर्व आईपीएस को अफसरों ने आनन-फानन में ऐसी प्रिजन वैन से रवाना कर दिया, जो न सिर्फ अनफिट थी बल्कि जिसका बीमा भी वर्षों पहले समाप्त हो चुका था। इस लापरवाही में करीब 450 किलोमीटर का लंबा और असुरक्षित सफर कराकर उनकी जान को जोखिम में डाला गया।

2018 में खत्म हुआ बीमा, 2021 से फिटनेस एक्सपायर परिवहन से जुड़े एक ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, जिस प्रिजन वैन UP-52 AG 0273 से अमिताभ ठाकुर को ले जाया गया— वाहन का बीमा 31 मार्च 2018 को समाप्त हो चुका है। वाहन की फिटनेस 12 नवंबर 2021 से एक्सपायर है। इसके बावजूद इसी जीप में उन्हें देवरिया जिला जेल से वाराणसी सेंट्रल जेल लाया गया, फिर जेल से एसीजेएम कोर्ट वाराणसी में पेश किया गया और देर रात उसी वाहन से वापस देवरिया भेज दिया गया।

पेशी के बाद भी नहीं बदला वाहन

जानकारी के अनुसार, पूरे आवागमन के दौरान न तो वाहन बदला गया और न ही वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की गई। यदि रास्ते में कोई दुर्घटना होती, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होती। मामले के उजागर होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

जिम्मेदारी पर शुरू हुआ बचाव

मामला सामने आने के बाद अफसर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते नजर आए। वाराणसी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि— “प्रिजन वैन देवरिया से लाई गई थी और देवरिया पुलिस लाइन से ही उपलब्ध कराई गई थी। वाराणसी पुलिस की किसी गाड़ी में पूर्व आईपीएस को नहीं भेजा गया। वाहन की जिम्मेदारी देवरिया पुलिस की है, हमें इसके बीमा और फिटनेस एक्सपायर होने की जानकारी नहीं थी।”

इस पूरे मामले ने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना बीमा और फिटनेस के वाहन सड़कों पर कैसे चल रहा था?
कैदी सुरक्षा और मानवाधिकारों की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी पूरी तरह विफल रही?

पूर्व आईपीएस अधिकारी जैसे हाई-प्रोफाइल बंदी के साथ इस स्तर की लापरवाही ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है या मामला सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा।

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