लखनऊ: मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना कल्बे जवाद नक़वी (Maulana Kalbe Jawad Naqv)i ने ‘उम्मीद पोर्टल’ (Umeed Portal) में लगातार आ रही तकनीकी खामियों, सर्वर डाउन रहने और वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण में उत्पन्न समस्याओं को लेकर सोमवार को जोहरी मोहल्ला स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि वक़्फ़ संपत्ति पंजीकरण के लिए बनाए गए ‘उम्मीद पोर्टल’ को ऐसे लोगों ने तैयार किया है जिन्हें औक़ाफ़ के बारे में बुनियादी जानकारी तक नहीं है।
मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि पोर्टल में रोज़ाना बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे मुतवल्लियों और वक़्फ़ संस्थाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार या पोर्टल डेवलपर्स ने न तो वक़्फ़ बोर्ड से राय ली और न ही औक़ाफ़ विशेषज्ञों से कोई सलाह मांगी। इसके कारण संयुक्त वक़्फ़ जैसे इमामबाड़ा, मस्जिद और कब्रिस्तान वाले मामलों में पंजीकरण संभव नहीं हो पा रहा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इमामबाड़ा ग़ुफ़रानमाब के वक़्फ़ में कब्रिस्तान और मस्जिद दोनों शामिल हैं, लेकिन पोर्टल अलग-अलग पंजीकरण की मांग कर रहा है, जो तकनीकी रूप से और धार्मिक रूप से त्रुटिपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि पोर्टल पर एक वक़्फ़ के दस से अधिक खसरे दर्ज करने की अनुमति नहीं है, जबकि कई वक़्फ़ संपत्तियाँ अनेक खसरों में फैली होती हैं। एक मुतवल्ली अनेक वक़्फ़ों की ज़िम्मेदारी संभालता है, लेकिन उम्मीद पोर्टल पर वह केवल एक ही वक़्फ़ का पंजीकरण कर सकता है। इसके अलावा जिन वक़्फ़ों की संपत्तियाँ अलग-अलग जिलों में हैं, उनके पंजीकरण में भी गंभीर बाधाएँ आ रही हैं।
मौलाना ने सर्वर की खराबी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले छह दिनों से पोर्टल खुल ही नहीं रहा है। इसके विपरीत SIR पोर्टल पर करोड़ों लोग जुड़े होने के बाद भी कोई तकनीकी समस्या नहीं आती, जबकि वक़्फ़ संपत्तियों की संख्या मात्र आठ लाख के आसपास है। उन्होंने आरोप लगाया कि या तो पोर्टल बनाने वाले औक़ाफ़ की प्रकृति को समझने में असमर्थ हैं या जानबूझकर ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है जिससे वक़्फ़ संपत्तियों को नुकसान पहुँचे।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौलाना ने हुसैनाबाद ट्रस्ट में पारदर्शिता की कमी को लेकर ज़िला मजिस्ट्रेट पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज़ और हिसाब-किताब न देने पर RTI अदालत द्वारा डीएम पर लगाया गया जुर्माना ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की कई कीमती वस्तुएँ गायब हैं जिनके बारे में डीएम ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने उन्हें जवाब के लिए तलब किया है।
मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि औक़ाफ़ की सुरक्षा, पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार और उम्मीद पोर्टल की समस्याओं को दूर कराने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने सरकार से तत्काल पोर्टल को दुरुस्त कराने और पंजीकरण की अवधि बढ़ाने की मांग की है।


