नई दिल्ली। गैंगस्टर विकास दुबे के जीवन पर आधारित फिल्म ‘यूपी-77’ की रिलीज पर रोक लगाने से दिल्ली उच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया है। अदालत ने विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए फिल्म के प्रदर्शन का रास्ता साफ कर दिया है। याचिका में फिल्म को परिवार की निजता का उल्लंघन बताते हुए इसके प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में रिचा दुबे ने दलील दी थी कि ‘यूपी-77’ एक अनधिकृत बायोग्राफिकल चित्रण है, जिसमें नाटकीय और सनसनीखेज सामग्री शामिल की गई है। उनका कहना था कि फिल्म के प्रदर्शन से उन्हें और उनके परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी और निजी जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हालांकि अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से मना कर दिया।
अदालत के फैसले के बाद अब फिल्म ‘यूपी-77’ के रिलीज होने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायालय ने माना कि याचिका में लगाए गए आरोप फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं। इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित के दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि विकास दुबे, जिसे विकास पंडित के नाम से भी जाना जाता था, उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर और गैंगस्टर था। उसके खिलाफ 1990 के दशक की शुरुआत से आपराधिक मामले दर्ज होते चले गए और वर्ष 2020 तक उस पर 60 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे। वह एक राज्य मंत्री की हत्या समेत कई गंभीर अपराधों में शामिल रहा था।
विकास दुबे पर उस वक्त पूरे देश का ध्यान गया, जब वह आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बना। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित करते हुए पांच लाख रुपये का इनाम रखा था। 9 जुलाई 2020 को उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यूपी लाते समय पुलिस वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद भागने और पुलिस पर हमला करने के प्रयास में जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद ‘यूपी-77’ फिल्म को लेकर चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया है और अब इसके दर्शकों तक पहुंचने का रास्ता खुल गया है।

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