लखनऊ/नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “कुछ लोग भारत छोड़कर सिंगापुर और जापान की यात्रा पर निकल गए हैं। हमारे धर्म के सबसे पूजनीय शंकराचार्य पर झूठा मुकदमा लगाना, यह दुख की बात है।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए केंद्र और राज्य की सत्ताधारी शक्तियों पर निशाना साधते हुए संकेत दिया कि देश के अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक संतों और प्रतिष्ठित हस्तियों को विवादों में घसीटा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद पर आसीन व्यक्तित्व करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र होते हैं। ऐसे में उन पर यदि कोई आरोप लगाया जाता है तो उसकी जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “बिना ठोस प्रमाण के मुकदमा दर्ज करना न केवल संत समाज का अपमान है, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी आहत करता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन धार्मिक प्रतिष्ठानों को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाना उचित नहीं है। अपने बयान में अखिलेश यादव ने “सिंगापुर और जापान की यात्रा” का उल्लेख करते हुए तंज कसा कि जब देश के भीतर गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, तब कुछ लोग विदेश दौरों में व्यस्त हैं। उनका इशारा किस ओर था, यह स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र सरकार की विदेश यात्राओं पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी मान रहे हैं।
अखिलेश यादव के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा खेमे से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी इसे “राजनीतिक बयानबाजी” करार दे सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धार्मिक मुद्दों पर दिए गए ऐसे बयान आगामी चुनावी माहौल में अहम भूमिका निभा सकते हैं। संत समाज और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति पर आरोप हैं तो कानून अपना काम करे, लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष और संविधानसम्मत होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि समाजवादी पार्टी धार्मिक आस्था और संविधान दोनों का सम्मान करती है।


