स्किल डेवलपमेंट का दावा, ज़मीनी हकीकत शून्य
फर्रुखाबाद। युवाओं के भविष्य को संवारने और उन्हें हुनरमंद बनाने के दावों के साथ हर वर्ष आयोजित होने वाला युवा महोत्सव अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। फर्रुखाबाद युवा महोत्सव समिति के बैनर तले होने वाले इस आयोजन पर आरोप है कि स्किल डेवलपमेंट के नाम पर सैकड़ों युवाओं को केवल सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि आज तक किसी भी प्रतिभा को आगे बढ़ने का वास्तविक अवसर नहीं मिला।
यह कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष डॉ संदीप शर्मा के तत्वाधान में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। आयोजन में गायन, नृत्य, भाषण, कला, सांस्कृतिक प्रस्तुति सहित कई प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं, जिनमें जिले भर से सैकड़ों युवा भाग लेते हैं।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि महोत्सव के दौरान केवल स्टेज कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं।
विजेताओं को प्रमाण पत्र और मोमेंटो देकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
प्रतियोगिता समाप्त होते ही कोई प्रशिक्षण, मार्गदर्शन या फॉलो-अप नहीं होता,युवाओं का आरोप है कि स्किल डेवलपमेंट का दावा केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह जाता है।
महोत्सव के माध्यम से किसी भी प्रतिभागी को रोजगार या प्लेसमेंट नहीं मिला, न ही किसी विजेता को राज्य या राष्ट्रीय स्तर के मंच से जोड़ा गया न किसी प्रकार की मेंटोरशिप या प्रोफेशनल ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई।
हर वर्ष आयोजन होता है, भीड़ जुटती है, लेकिन युवाओं का भविष्य वहीं का वहीं रह जाता है।
पुराने प्रतिभागी आज भी बेरोजगार पिछले कई वर्षों में महोत्सव में शामिल रहे युवाओं का कहना है कि “हमें कहा गया था कि यह मंच आगे का रास्ता खोलेगा, लेकिन आज भी हम उसी जगह खड़े हैं जहाँ पहले थे।”
स्थानीय स्तर पर यह सवाल अब खुलकर उठ रहा है कि यदि यह महोत्सव सच में युवाओं के लिए है, तो अब तक एक भी उदाहरण सामने क्यों नहीं आया?
आयोजन को लेकर खर्च और फंडिंग की कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं उपलब्धियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं,हर साल वही दावे, वही कार्यक्रम, वही तस्वीरें जिससे आयोजन की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
युवाओं ने मांग की है कि समिति अपने स्किल डेवलपमेंट के दावों का सार्वजनिक विवरण दे, यह स्पष्ट करे कि महोत्सव से किसे, क्या और कैसे लाभ मिला भविष्य में केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि ठोस अवसर उपलब्ध कराए जाएं।युवा महोत्सव यदि वास्तव में युवाओं के लिए है, तो उसे केवल इवेंट नहीं, अवसर बनना होगा।
अन्यथा यह आयोजन भी उन कार्यक्रमों की सूची में शामिल हो जाएगा,जहाँ तालियाँ तो बजती हैं, लेकिन युवाओं का भविष्य नहीं बनता।

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