नियमों की अनदेखी और प्रशासन की सुस्ती से राजस्व की खाई बढ़ी, यात्री भी जोखिम में
फर्रुखाबाद। जिले में प्राइवेट बस संचालकों के अनधिकृत और अवैध संचालन से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ है। परिवहन विभाग की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिर्फ पिछले तीन महीनों में 50 से अधिक प्राइवेट बसें बिना परमिट और लाइसेंस के चल रही थीं।
इन अवैध बसों से राज्य को लगभग 15 लाख रुपए का प्रत्यक्ष राजस्व नुकसान हुआ।
अवैध बसें सरकारी बसों के नियमित मार्गों पर चल रही हैं, जिससे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
विभाग की जानकारी के अनुसार, इन बसों में ओवरलोडिंग और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन आम बात है।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि कई प्राइवेट बस संचालक सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी कर जिले में मुनाफा कमा रहे हैं। इससे न केवल राजस्व खाता खाली हो रहा है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें अवैध बसों की गोपनीय जांच, रूट रैगुलराइजेशन और परमिट सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राइवेट बस संचालन पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण नहीं रखा गया, तो भविष्य में न केवल राजस्व का नुकसान, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री सुविधा में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्राइवेट बसों के अनियंत्रित संचालन ने यह दिखा दिया है कि कानून का पालन तभी प्रभावी होगा जब प्रशासन सतर्क और सक्रिय हो। अवैध बसों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इससे राजस्व और यात्री सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अब समय है कि प्रशासन ऑपरेशन और निगरानी को तेज करे, ताकि राज्य को होने वाले नुकसान को रोका जा सके और सार्वजनिक परिवहन सुरक्षित और विश्वसनीय बने।


