– कानपुर के वकील अखिलेश दुबे से भी बड़ा शातिर है अवधेश मिश्रा
– सपा सरकार में रहता आतंक कानून को खुलकर बनाया था हथियार
फर्रुखाबाद।
जनपद फतेहगढ़ कचहरी में अधिवक्ता अवधेश मिश्रा पुत्र संतोष निवासी पालीवाल गली, भोलेपुर कोतवाली फतेहगढ़ का नाम इन दिनों चर्चा में है। उन पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने अपने प्रभाव और कानून की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए कई निर्दोष लोगों, पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और अपने विरोधियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर उत्पीड़ित किया। बताया जाता है कि अवधेश मिश्रा का नाम पहले से ही कुख्यात अधिवक्ता अखिलेश दुबे (कानपुर) जैसे विवादित मामलों की तर्ज पर उभर कर सामने आया है।
राजधानी लखनऊ से प्रकाशित दैनिक यूथ इंडिया के प्रधान संपादक शरद कटियार ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि वह वर्ष 2015 से लगातार फतेहगढ़ कचहरी से जुड़े एक आपराधिक गिरोह के निशाने पर हैं।
इस गिरोह में प्रमुख रूप से वकील अवधेश मिश्रा, माफिया अनुपम दुबे, संजीव परिया, योगेन्द्र सिंह यादव उर्फ चन्नू, देवेंद्र सिंह यादव उर्फ जग्गू और खालिद उर्फ रज्जू खान शामिल रहे।
कटियार के अनुसार, इन लोगों ने “भूमिया गिरी” और “आपसी गठजोड़” के ज़रिए बार एसोसिएशन तथा प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव बना रखा था।
पत्रकार कटियार का आरोप है कि उनकी राष्ट्रवादी और ईमानदार लेखनी से ये सभी अपराधी परेशान थे।
उन्होंने वर्ष 2015 में यूथ इंडिया में “संगीनों के साए में तो नहीं जिला फर्रुखाबाद” शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें घटियाघाट (पांचाल घाट) क्षेत्र में संदिग्ध प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों का खुलासा किया गया था।
रिपोर्ट के प्रकाशित होते ही अवधेश मिश्रा और उनके साथी भड़क गए।
शरद कटियार के अनुसार, उनके खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज कराने की शुरुआत इसी के बाद हुई।
कटियार ने बताया कि अवधेश मिश्रा ने अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए उनके और उनके पत्रकार साथियों के विरुद्ध एक के बाद एक कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए —
21 मार्च 2019 की रात को कोतवाली मोहम्मदाबाद में धारा 307, 504, 506 भादवि के तहत मुकदमा अपराध संख्या 106/2019 दर्ज कराया गया।
वर्ष 2015 में खालिद उर्फ रज्जू खान और अवधेश मिश्रा के इशारे पर आशिया पुत्री नबी हसन के माध्यम से धारा 376डी, 364 आईपीसी के तहत झूठा मामला दर्ज कराया गया।
बाद में दो विवेचनाओं में मुकदमा पूर्णतः झूठा पाया गया और वादिनी ने स्वयं न्यायालय में बयान देकर सच्चाई उजागर की कि वह प्रार्थी को जानती तक नहीं।
इसी प्रकार थाना मऊदरवाजा में मुकदमा अपराध संख्या 309/2015 दर्ज हुआ, जिसमें वादिनी नरगिस पत्नी कमलेश निवासी नात नगला हाथीपुर थाना मऊ दरवाजा ने भी बाद में न्यायालय में कहा कि उसे झूठे मुकदमे में फँसाया गया।
इसके अलावा अवधेश मिश्रा और संजीव परिया द्वारा धारा 504, 506, आईटी एक्ट आदि के कई मुकदमे दर्ज कराए गए जिनकी संख्या क्रमशः 141/2015, 656/2016, 21/2017 रही।
अवधेश मिश्रा और संजीव परिया ने कथित रूप से मुकदमे वापस लेने के बदले 10 लाख रुपये की रिश्वत की मांग भी की थी।
जब पत्रकार शरद कटियार ने इन अपराधियों के आगे झुकने से इनकार किया, तो संजीव परिया ने मात्र एक माह में उनके विरुद्ध 10 मानहानि परिवाद (धारा 500 भादवि) दर्ज कराए जिनकी वाद संख्याएँ — 2308 से लेकर 2318 तथा 3006 तक हैं।
शरद कटियार के अनुसार, अवधेश मिश्रा और उनके गिरोह ने कई बार उन पर जानलेवा हमले करवाए, लेकिन प्रभावशाली दबाव के चलते पुलिस मुकदमे दर्ज नहीं कर सकी।
यदि कुछ मामलों में रिपोर्ट दर्ज भी हुई, तो वकीलों और राजनैतिक हस्तक्षेप से अंतिम रिपोर्ट लगवा दी गई।
अवधेश मिश्रा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने शरद कटियार के पारिवारिक विवादों का लाभ उठाकर उनके ससुराल पक्ष को अपने पक्ष में कर लिया।
कटियार ने बताया कि अवधेश मिश्रा ने उनके ससुराल जनों से मिलीभगत कर उनके खिलाफ नए मुकदमे दर्ज करवाए।
यहाँ तक कि 05 जनवरी 2021 को कोतवाली कन्नौज में मुकदमा अपराध संख्या 16/2021, धारा 354, 506 भादवि व पाक्सो एक्ट 7/8 में दर्ज कराया गया, जबकि यह मामला बाद में धन के लेनदेन और संपत्ति हड़पने की साजिश से जुड़ा पाया गया।
इसके अतिरिक्त, अवधेश मिश्रा के इशारे पर उसने अपनी क्लाइंट वादिनी अर्पिता कटियार के माध्यम से भी गैंगरेप का झूठा मुकदमा 156(3) सीआरपीसी के तहत न्यायालय में प्रस्तुत कराया गया था।
कटियार के अनुसार, यह मुकदमा भी न्यायालय से आदेश न मिलने पर “राजनैतिक और न्यायिक दबाव” के ज़रिए दर्ज कराया गया।
जब पुलिस और जिला प्रशासन ने इनके झूठे आरोपों पर कार्रवाई नहीं की, तो अवधेश मिश्रा ने तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा तक के खिलाफ शिकायतें उच्च अधिकारियों को भेजीं।
शरद कटियार का कहना है कि अवधेश मिश्रा अब सिर्फ एक वकील नहीं बल्कि “कानूनी आतंक” का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मिश्रा के इशारे पर दर्ज अधिकांश मुकदमे झूठे पाए गए, लेकिन उनकी पहुंच और धनबल के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कटियार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे गिरोह की निष्पक्ष जांच किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि फर्रुखाबाद की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भय और भ्रष्टाचार समाप्त हो सके।





