– एक बार फिर लखनऊ में हाई-टेक ठगी
लखनऊ: एक बार फिर चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ साइबर ठगों ने तकनीक का इस्तेमाल कर न सिर्फ एक बुज़ुर्ग को डिजिटल अरेस्ट (digitally arrested) में रखा बल्कि उनके बेटे से डर का फायदा उठाकर कुल 1.29 करोड़ रुपये की ठगी (duped) कर ली। पीड़ित परिवार मर्चेंट नेवी से रिटायर अफसर सुरिंद्र पाल सिंह का है, जिनके सौ वर्षीय पिता को एक कॉल पर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर डराया और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। इसके बाद उन्हें छह दिन तक वीडियो कॉल और फोन के माध्यम से निगरानी में रखा गया।
बुज़ुर्ग को सख्त निर्देश दिया गया कि वे घर से बाहर न निकलें और किसी से बात न करें। लगातार कॉल और धमकियों के बीच पूरे परिवार को विश्वास हो गया कि सीबीआई अधिकारी ही उनसे बात कर रहे हैं। इसी डर के माहौल में बेटे ने एक के बाद एक खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। जांच में सामने आया कि जिन खातों में पैसे भेजे गए, वे गुजरात, गोवा और जलगांव की विभिन्न शाखाओं से जुड़े थे।
ठगों ने बार-बार भरोसा दिलाया कि पैसा सुरक्षित है और जांच पूरी होते ही वापस कर दिया जाएगा। लेकिन जब लंबे समय तक न पैसा लौटा और न ही कोई वैधानिक सूचना मिली, तो पीड़ित परिवार को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद परिवार ने साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश के पढ़े-लिखे, जागरूक माने जाने वाले तबकों को भी ठगों का नेटवर्क कितनी आसानी से शिकार बना सकता है।
यह मामला न सिर्फ ठगी का एक गंभीर उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी साइबर अपराध की नई तकनीकें आम लोगों के जीवन में दहशत फैला रही हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इतनी बड़ी रकम की ठगी से यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या हमारा साइबर तंत्र इन गिरोहों से लड़ पाने में सक्षम है?