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Sunday, March 15, 2026

देशभर में महंगा हुआ फास्टैग एनुअल पास, 1 अप्रैल से बढ़ी दरें लागू

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हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों पर पड़ेगा असर, जानें क्या है नया नियम और कितना देना होगा शुल्क

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए अहम खबर है। सरकार ने फास्टैग एनुअल पास की कीमत में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें आगामी 1 अप्रैल से लागू की जाएंगी। इसके बाद फास्टैग एनुअल पास लेने वाले वाहन मालिकों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा।

सरकारी जानकारी के अनुसार फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। यानी वाहन चालकों को अब इस सुविधा के लिए 75 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। यह संशोधित शुल्क नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा।

फास्टैग एनुअल पास उन वाहन चालकों के लिए विशेष सुविधा है जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर अक्सर यात्रा करते हैं। इस पास के माध्यम से टोल प्लाजा पर बार-बार भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती और डिजिटल माध्यम से स्वचालित रूप से टोल शुल्क कट जाता है।

यह पास मुख्य रूप से गैर-व्यावसायिक वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए उपलब्ध है। एनुअल पास लेने के बाद वाहन चालक एक वर्ष की अवधि या अधिकतम 200 बार टोल प्लाजा पार करने तक इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इनमें से जो भी सीमा पहले पूरी हो जाती है, उसी के अनुसार पास की वैधता समाप्त हो जाती है।

सरकार ने देशभर में टोल भुगतान को आसान और डिजिटल बनाने के लिए फास्टैग प्रणाली लागू की थी। इस प्रणाली से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आई है और ईंधन की भी बचत होती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में करोड़ों वाहन फास्टैग प्रणाली से जुड़े हुए हैं और बड़ी संख्या में वाहन मालिक एनुअल पास सुविधा का उपयोग करते हैं। ऐसे में फीस में बढ़ोतरी का असर सीधे लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा।

वाहन चालकों पर क्या पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एनुअल पास की कीमत में बढ़ोतरी भले ही मामूली है, लेकिन नियमित रूप से हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा। हालांकि सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से टोल प्रबंधन, हाईवे रखरखाव और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

फास्टैग के माध्यम से टोल भुगतान पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से होता है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगे टैग को स्कैन करते ही टोल शुल्क सीधे बैंक खाते या वॉलेट से कट जाता है। इससे समय की बचत होती है और नकद लेन-देन की जरूरत समाप्त हो जाती है।

सरकार लगातार देशभर में फास्टैग प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को अधिक सुगम और तेज बनाया जा सके। नए वित्तीय वर्ष से लागू होने वाली बढ़ी हुई दरों के बाद अब हाईवे पर नियमित रूप से यात्रा करने वाले वाहन चालकों को फास्टैग एनुअल पास के लिए पहले से अधिक शुल्क देना

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