– टमाटर, तरोई, मिर्च और कद्दू की फसल तबाह, कर्ज में डूबे किसान सरकार की राहत का कर रहे इंतजार
कानपुर। चौबेपुर क्षेत्र में बीते दिनों हुई अचानक ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया। खासतौर पर सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए यह आपदा किसी बड़े आर्थिक झटके से कम नहीं है। खेतों में तैयार खड़ी टमाटर, तरोई, मिर्च और कद्दू की फसलें ओलों की मार से बुरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है।
चौबेपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में किसान परंपरागत फसलों के बजाय सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं। इन फसलों में लागत अधिक होती है, जिसमें बीज, खाद, दवाइयां, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। किसानों का कहना है कि उन्होंने इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद में भारी निवेश किया था, लेकिन अचानक आई ओलावृष्टि ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
ओलों की मार इतनी तेज थी कि खेतों में लगी सब्जियां पूरी तरह बिछ गईं। टमाटर की बेलें टूट गईं, मिर्च के पौधे झुककर जमीन पर गिर गए और कद्दू व तरोई की फसल पूरी तरह खराब हो गई। कई खेतों में तो फसल इस कदर नष्ट हो गई है कि उसे पशुओं के चारे के रूप में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
किसानों का कहना है कि उन्होंने बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेकर खेती की थी। अब फसल बर्बाद होने के बाद कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी है। कई किसानों ने बताया कि अगर समय रहते सरकार की ओर से मदद नहीं मिली, तो उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान का आंकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि फसल बीमा योजना के तहत उन्हें जल्द भुगतान किया जाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।
स्थानीय स्तर पर प्रशासन की सक्रियता अभी तक सीमित नजर आ रही है। किसानों का आरोप है कि अभी तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा है और न ही नुकसान का सही आकलन शुरू हुआ है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
ओलावृष्टि से सब्जी किसानों पर टूटा संकट, चौबेपुर में फसलें बर्बाद—मुआवजे की मांग तेज


