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Wednesday, April 8, 2026

फर्रुखाबाद में पीएम किसान सम्मान निधि में बड़ा खेल! शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, विभागीय मिलीभगत

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फर्रुखाबाद। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में कथित गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का मामला इन दिनों जिले में चरम पर है , जिसमें एक अधिवक्ता पर गलत तरीके से योजना का लाभ लेने और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। मामले में शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों का लाभ लेने का आरोप रमेश प्रताप सिंह उर्फ अहिबरन सिंह द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है, कि राहुल प्रताप सिंह परिहार, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। शिकायत के अनुसार, संबंधित व्यक्ति योजना की पात्रता में नहीं आते, इसके बावजूद गलत तथ्यों के आधार पर आवेदन कर कई किश्तों का लाभ प्राप्त कर लिया गया।
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि योजना का लाभ लेने के लिए भूमि संबंधी जानकारी में भी हेरफेर किया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया, जो एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 3 फरवरी 2026 को साक्ष्यों सहित शिकायती पत्र संबंधित विभाग को दिया गया था, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, उप कृषि निदेशक कार्यालय से जारी पत्र में भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच का उल्लेख किया गया है। पत्र में शिकायत संख्या का हवाला देते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पपीड़ित ने जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी से मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर उन्हें दंडित करने की मांग उठाई गई है।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी महत्वाकांक्षी योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर भी गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल, मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या मामला कागजों तक ही सीमित रह जाता है।

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