उन्नाव।  प्लॉट दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जनशक्ति ग्रुप से जुड़ी अवैध प्लॉटिंग के आरोपों को लेकर पीड़ित महिलाएं खुलकर सामने आई हैं। महिलाओं का आरोप है कि महेंद्र यादव और आर.एस. चौहान ने उन्हें प्लॉट देने का झांसा देकर लाखों रुपये की वसूली की, लेकिन न तो प्लॉट दिया गया और न ही अब पैसा वापस किया जा रहा है।
गरीबों को बनाया गया शिकार
पीड़ितों के अनुसार, जनशक्ति ग्रुप के नाम पर भरोसा दिलाकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों से किस्तों में पैसे लिए गए। कई महिलाओं ने अपने घर के गहने गिरवी रखकर और उधार लेकर रकम जमा की, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी उन्हें न जमीन मिली और न ही कोई वैध कागजात।
अवैध प्लॉटिंग का जाल आरोप है कि हुसैन नगर, ओराहर और कोटरा इलाके में बिना लेआउट स्वीकृति बिना विकास प्राधिकरण की अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लॉटिंग की गई। इतना ही नहीं, सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें निजी बताकर बेचने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
स्टाम्प चोरी और कागजी खेल पीड़ितों का कहना है कि कई मामलों में रजिस्ट्री नहीं कराई गई अधूरे या फर्जी एग्रीमेंट दिए गए और स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की गई जिससे सरकार को भी राजस्व का नुकसान हुआ है।
सबूत होने के बावजूद कार्रवाई नहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ितों के पास रसीदें एग्रीमेंट मौजूद होने के बावजूद प्रशासन अब तक मूकदर्शक बना हुआ है। पीड़ित महिलाएं कई बार थाने और अधिकारियों के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि “हमें प्लॉट देने का वादा किया गया था, लेकिन न जमीन मिली और न ही हमारे पैसे लौटाए जा रहे हैं। अब हमें धमकाया भी जा रहा है।” इस पूरे मामले ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बिना मिलीभगत के इतनी बड़ी अवैध प्लॉटिंग संभव है? आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
उन्नाव में सामने आया यह मामला सिर्फ़ जमीन घोटाले का नहीं, बल्कि गरीबों के सपनों को लूटने का है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे गिरोह और भी लोगों को ठगते रहेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here