फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों का खेल, लखनऊ–रायबरेली कनेक्शन उजागर
रायबरेली।
जनपद रायबरेली में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा से 9.20 करोड़ रुपये के फर्जी लोन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी आधार कार्ड, गलत पते और 15 सरकारी विभागों के कूटरचित सैलरी दस्तावेजों के सहारे यह लोन स्वीकृत कराया गया। इस पूरे खेल में किसी बड़े संगठित सिंडिकेट की आशंका जताई जा रही है।
लखनऊ के दो बैंक खातों से जुड़ा है पूरा खेल
जांच के दौरान यह अहम तथ्य सामने आया कि लोन भले ही रायबरेली की बैंक ऑफ़ बड़ौदा शाखा से लिया गया हो, लेकिन धनराशि के लेन-देन के तार लखनऊ स्थित यूको बैंक के दो खातों से जुड़े हैं। ये दोनों खाते आदर्श ट्रेडर्स और रायबरेली ट्रेजर के नाम से खोले गए थे, जिनके माध्यम से सोर्स ऑफ इनकम दर्शाकर बैंक को गुमराह किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक की तहरीर पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में 48 नामजद आरोपियों को शामिल किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से बैंकिंग नियमों की अनदेखी कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लोन पास कराया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने 15 अलग-अलग सरकारी विभागों के फर्जी वेतन प्रमाण पत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी आधार कार्ड, गलत पते और कूटरचित पहचान पत्रों का सहारा लिया गया।
बड़े नेटवर्क की जांच के आदेश
पुलिस और बैंकिंग एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि—
फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए,बैंक के अंदरूनी सिस्टम में किसकी भूमिका रही।
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल रायबरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और बड़े बैंकिंग सिंडिकेट से भी जुड़े हो सकते हैं।
आगे और गिरफ्तारियों के संकेत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन एनालिसिस के बाद और भी नाम सामने आ सकते हैं। जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।




