लखनऊ: राजधानी लखनऊ में आपसी रंजिश के चलते फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। वजीरगंज थाने में सामने आया एक मामला तो हैरान करने वाला है, जहां एक महिला ने जमीनी विवाद के कारण कई लोगों पर झूठे आरोप लगाने के साथ-साथ एक ऐसे व्यक्ति पर भी एफआईआर दर्ज करा दी, जिसकी मौत साल 2014 में ही हो चुकी थी। महिला ने अहमद, हसीबुल, अमिताभ तिवारी, तारा बाजपेई और वशिष्ठ तिवारी समेत कई लोगों पर मकान कब्जा करने, जातिगत टिप्पणी करने, मारपीट करने और जानमाल की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। मामला महिला से जुड़ा होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच एसीपी चौक को सौंपी थी। पुलिस विवेचना में पूरा मामला उलट गया और महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप झूठे पाए गए। जांच में स्पष्ट हुआ कि विवाद ग्राम खरिया सेमरा की 2000 वर्ग फीट जमीन को लेकर था। जिस मकान पर कब्जे का आरोप लगाया गया था, उस पर आरोपी हसीबुल रहमान पहले से ही रहता था। घटना के दिन न महिला और न ही आरोपी किसी भी तरह घटनास्थल पर मौजूद थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि महिला ने जिस वशिष्ठ तिवारी को आरोपी बनाया था, उसकी 2014 में ही मृत्यु हो चुकी थी, इसके बावजूद उसका नाम मुकदमे में शामिल किया गया। जांच अधिकारी ने आरोपियों को राहत देते हुए मामला उल्टा महिला के विरुद्ध कोर्ट भेज दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एफआईआर दर्ज होना किसी भी मामले को सिद्ध नहीं करता। पीड़ित को राहत या प्रतिकर तभी दिया जा सकता है जब पुलिस विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल करे और आरोप सिद्ध हों। अदालत ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की दोषी महिला को तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि इस मामले में वादिनी को यदि कोई राहत राशि या प्रतिकर दिया गया है तो उसे तुरंत वापस लिया जाए।





