लखनऊ| राजधानी की मोहनलालगंज तहसील के केवली गांव में करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर बड़ा जालसाजी कांड सामने आया है। राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर वर्ष 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए दो सगे भाइयों—मोहम्मद जुबेर और मोहम्मद बैश—की बेशकीमती कृषि भूमि को जालसाजों ने एक मृत महिला के नाम दर्ज करा दिया। लंबे समय तक यह फर्जीवाड़ा राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में छिपा रहा और संबंधित कर्मचारी भी मामले पर पर्दा डालते रहे।
गांव की गाटा संख्या 403 और 404 की भूमि दशकों से इन दोनों भाइयों के नाम खतौनी में दर्ज थी। ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के बाद दोनों भाई पाकिस्तान चले गए थे और कभी कोई वारिस गांव नहीं लौटा। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने 13 फरवरी 2024 को कथित दुरुस्ती आदेश तैयार कराया और राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से दोनों गाटों को मृत महिला के नाम चढ़वा दिया।
मामले की भनक लगने पर गांव के निवासी संदीप कुमार ने आईजीआरएस के माध्यम से जिले के उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजी। शिकायत पर तहसील अधिकारियों ने जांच कराई, जिसमें लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़े की पुष्टि कर दी। इसके बाद राजस्व विभाग ने अभिलेखों से फर्जी आदेश को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन जालसाजी गिरोह की मजबूत पकड़ के कारण कार्रवाई बेहद धीमी रही।
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के बावजूद केवल गाटा संख्या 403 के फर्जी आदेश को निरस्त करने के लिए औपचारिक सुनवाई शुरू हो सकी, जबकि गाटा संख्या 404 की रिपोर्ट तहसील दफ्तर की फाइलों में ही दबकर रह गई। ग्रामीणों का आरोप है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी न तो सभी आदेश निरस्त हुए और न ही जालसाजों या संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
एसडीएम पवन पटेल ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी मिल चुकी है। सोमवार को तहसीलदार को पत्र लिखकर विस्तृत जांच का आदेश दिया जाएगा, ताकि पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन सक्रिय न हुआ तो करोड़ों की सरकारी व निजी संपत्तियों पर ऐसे फर्जीवाड़े लगातार बढ़ते रहेंगे।





