– पीलीभीत बाइपास के किनारे जमीन देने से इनकार
– बीडीए को जमीन देने का मतलब है बच्चों को कटोरा पकड़ाना
– 21 साल पुराने मुआवजे का विवाद भी बना कारण
बरेली: बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) पीलीभीत बाइपास के पास नई टाउनशिप विकसित (new township continues) करने की योजना बना रहा है, लेकिन जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। 21 साल पहले चंदपुर, बिचपुरी और आस-पास के गांवों में बीडीए के अधिग्रहण के दौरान किसानों को मुआवजा नहीं मिलने के चलते भू स्वामी प्राधिकरण पर विश्वास की कमी है।
तीन दिन पहले अधिग्रहण के लिए लेखपाल-कानूनगो जब किसानों से सहमति लेने पहुंचे तो किसानों ने बीडीए के खिलाफ नारेबाजी की। हाल ही में मामले की जांच के दौरान किसान बीडीए के प्रति काफी नाराज नजर आए। इस बारे में पूछताछ के लिए बीडीए के उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल सुनने के बाद बिना जवाब दिए ही कॉल काट दी।
नई टाउनशिप के दायरे में आने वाला अड़ूपुरा जागीर गांव पीलीभीत मार्ग से लगभग एक किलोमीटर दूर नहर के किनारे स्थित है। यहां की जमीन सिंचाई के अच्छे साधनों के कारण बहुत उपजाऊ है। साथ ही, पास में एयरपोर्ट और बरेली महानगर होने के कारण जमीन की कीमत भी अधिक है। दोपहर को गांव के प्राथमिक स्कूल के पास सड़क किनारे करीब 30-35 किसान बीडीए के अधिग्रहण प्रस्ताव के खिलाफ चर्चा करते नजर आए।
किसानों ने बताया कि बीडीए के लेखपाल हाल ही में जमीन अधिग्रहण के लिए समझाने आए थे, लेकिन उन्होंने जमीन देने से साफ मना कर दिया। किसान आरोप लगाते हैं कि बीडीए ने वर्ष 2005 में चंदपुर और बिचपुरी के किसानों से जमीन ली थी, लेकिन तब से लेकर अब तक मुआवजा नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जमीन देने का मतलब है अपने बच्चों को भूखों रखना। मुआवजा चाहे कुछ भी हो, वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जबरदस्ती करेगा तो वे अपने प्राण तक देने को तैयार हैं।