फर्रुखाबाद। फर्जी विद्यालय संचालित करने के नाम पर सत्ता की हालत में सरकारी सहायता प्राप्त करने और उसका घोटाला करने के संबंध में भाजपा अमृतपुर के संयोजक विजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र से भेज कर जांच करवाने व दोष पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की।
श्री गुप्ता ने सी एम को भेजे शिकायती पत्र में कहा कि पूर्व जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी नदीम अहमद फारूकी द्वारा समाजवादी पार्टी की सरकार में सत्ता की हनक में विभिन्न प्रकार की संस्थाये/ स्कूलो की फर्जी तरीके से मान्यता एवं फर्जी भूमि दर्शाकर समाजवादी पार्टी के जनप्रतिनिधियों से विद्यालय के निर्माण हेतु लाखों रूपयों का घोटाला एवं संचालित फर्जी संस्थाओं की जांच की जाये।
फारूकी पुत्र काजी मकबूल अहमद निवासी मो० काजीटोला शमसाबाद जनपद पूर्व जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टीद्वारा समाजवादी पार्टी की सरकार में सत्ता की हनक में अधिकारियों से फर्जी तरीके से सरकारी भूमि पर एवं फर्जी मान्यतायें प्राप्त कर दस्तावेजों में किसी अन्य भूमि को दर्शाकर विद्यालय एवं संस्थाओं की मान्यता प्राप्त कर ली गई जबकि वर्तमान में एम०ए० फारूंकी मेमोरियल स्कूल स्थित मो० काजीटोला में विद्यालय संचालित है जिसमे फर्जी तरीके से विभिन्न प्रकार की संस्थाये अभिलेखों में दर्शाई गई है। उक्त के सम्वन्ध में विन्दुवार जांच किया जाना अति आवश्यक है।
शिकायती पत्र में कहा गया किएम०ए० फार्सकी मेमोरियल इन्टर कॉलेज मो० काजीटोला खारयन्दी शमसाबाद के गाटा संख्या 424 रकवा 0.042 हे० भूमि पर बना हुआ है जबकि उक्त गाटा संख्या 424 जिस पर विद्यालय बना हुआ है उक्त गाटा संख्या 424 राजस्व अभिलेखों में नॉन जेड ए के नाम दर्ज है। एवं गाटा संख्या 425, 426 एवं 427 रकवा 0.170 जिस पर विद्यालय की फर्जी तरीके से मान्यता को दर्शाया गया है जबकि उपरोक्त गाटा संख्या 425. 426 एवं 427 का 1/3 हिस्सा की जमीन ही विद्यालय के नाम दर्ज है जबकि विद्यालय का भवन उपरोक्त सभी गाटा संख्याओं की जमीन पर अवैध कब्जा कर बना लिया गया है और विना मान्यत्ता प्राप्त किये ही विद्यालय संचालित किया जा रहा है।एम०ए० फार्रुकी पब्लिक प्राइमरी स्कूल जो कि खारधन्दी शमसाबाद के गाटा संख्या 238 पर मान्यता प्रदान की गई थी, वर्तमान में उक्त गाटा संख्या 238 पर आबादी बनी हुई है जबकि उक्त विद्यालय उस गाटा संख्या पर बना ही नही है। जिसको फर्जी तरीके से समाजवादी पार्टी की सत्ता अधिकारियों पर दबाव बनाकर फर्जी तरीके से मान्यता प्राप्त कर ली गई थी।






