– फर्रुखाबाद, बांदा और मिर्जापुर में सख्त और ईमानदार प्रशासन की पहचान—जल संचयन और स्वच्छता के लिए भी मिला सम्मान
कानपुर: यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप के चीफ एडिटर शरद कटियार ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और फर्रुखाबाद, बांदा व मिर्जापुर जैसे जिलों में अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए चर्चित रहे अनुराग पटेल से उनके कानपुर स्थित निजी आवास पर गुरुवार विशेष साक्षात्कार किया। इस दौरान उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव, चुनौतियों और वर्तमान व्यवस्था पर खुलकर विचार रखे।
प्रशासन का पहला धर्म—जनता के प्रति जवाबदेही
अनुराग पटेल ने कहा कि एक जिलाधिकारी के रूप में उनका सबसे बड़ा लक्ष्य हमेशा जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना रहा। उन्होंने बताया कि फर्रुखाबाद में कार्यकाल के दौरान उन्होंने अवैध खनन, भू-माफियाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए।
“जल संचयन में मिसाल, मिला केंद्र और राज्य का सम्मान”
अनुराग पटेल ने अपने कार्यकाल के दौरान जिलाधिकारी रहते विशेष रूप से जनपद बांदा और मीरजापुर जल संरक्षण और जल संचयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उनके प्रयासों को न सिर्फ स्थानीय स्तर पर सराहा गया, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि “पानी का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा निवेश है।”
स्वच्छ भारत के प्रति संवेदनशील सोच
उन्होंने बताया कि स्वच्छता उनके प्रशासनिक एजेंडे का अहम हिस्सा रहा। स्वच्छ भारत अभियान के तहत उन्होंने जनभागीदारी को बढ़ावा दिया और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई नवाचार किए। उनकी सोच हमेशा स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण की रही।
अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
अनुराग पटेल ने साफ कहा कि उनके कार्यकाल में अपराध और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं थी। उन्होंने कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और सख्त कार्रवाई के जरिए अपराध पर नियंत्रण स्थापित किया। उनका मानना है कि “जहां कानून का राज मजबूत होता है, वहीं विकास संभव होता है।
बांदा में पानी और मिर्जापुर में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बांदा में जल संकट सबसे बड़ी समस्या थी, जिसके समाधान के लिए उन्होंने कई योजनाएं लागू कीं। वहीं मिर्जापुर में कानून व्यवस्था को पटरी पर लाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे सख्ती और पारदर्शिता के साथ संभाला गया।
ईमानदारी आसान नहीं, लेकिन जरूरी है
पटेल ने कहा कि सिस्टम में ईमानदारी बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन अगर अधिकारी दृढ़ संकल्पित हो तो बदलाव संभव है। उन्होंने युवाओं को सिविल सेवा में आने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि “देश को ईमानदार और साहसी अधिकारियों की जरूरत है।
आज के प्रशासन में सुधार की जरूरत
वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन अभी भी जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने की सलाह दी।
शरद कटियार के सवाल—सीधे और तीखे
इंटरव्यू के दौरान शरद कटियार ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल उठाए, जिनमें राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था शामिल रहे। अनुराग पटेल ने बेबाकी से हर सवाल का जवाब दिया और अपने अनुभव साझा किए।
रिटायरमेंट के बाद भी समाज सेवा जारी
अनुराग पटेल ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद भी वे सामाजिक कार्यों और जनहित के मुद्दों में सक्रिय हैं। उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है, जो जीवनभर निभाई जानी चाहिए।


