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Saturday, March 21, 2026

एक्सक्लूसिव: पूर्व विधायक विजय सिंह और दमयंती सिंह की हिस्ट्रीशीट के बाद जारी हुए शस्त्र लाइसेंस

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– जिला प्रशासन में पूर्व पालिका अध्यक्ष की प्रेस कांफ्रेंस के बाद दस्तावेजी आंकड़े खगालने किये शुरू
– नाला मछरट्टा स्थित बहुखंडीय मकान की भी जाँच शुरू
– बिना मानचित्र वह निर्माण का नगर मजिस्ट्रेट ने लिया संज्ञान
– समर्थकों पर भी निगरानी शुरू, सोशल मीडिया पर नजरें
फर्रुखाबाद। जनपद के चर्चित सपा के पूर्व विधायक विजय सिंह और उनकी पत्नी दमयंती सिंह फिर सुर्खियों में हैँ । लालच सट्टा स्थित उनके मकान की पत्रावली भी प्रशासन खगालनी शुरू की हैं।यूथ इंडिया को मिले दस्तावेजों, न्यायालयी अभिलेखों और आरटीआई आवेदन से जुड़े तथ्यों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन को मिली जानकारी के अनुसार थाना कादरीगेट क्षेत्र में वर्ष 1997 में दर्ज मुकदमा संख्या 113/97 (धारा 25 आर्म्स एक्ट) और मुकदमा संख्या 343/97 (धारा 420 आईपीसी व 30 आर्म्स एक्ट) लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहे।
दस्तावेजों में उल्लेख है कि जब यह मामले अदालत में चल रहे थे, उसी दौरान 4 नवंबर 2002 को तीन शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए गए। इन लाइसेंसों के नंबर 6259, 6260 और 6261 बताए गए हैं। यहीं से पूरे मामले पर संदेह गहरा जाता है, क्योंकि सामान्य नियमों के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे व्यक्ति को शस्त्र लाइसेंस देने से पहले विस्तृत जांच की जाती है।
आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी और हस्तलिखित नोट्स में यह आरोप भी सामने आया है कि लाइसेंस बनवाने के दौरान गलत पता और भ्रामक जानकारी का इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी आरोप है कि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया अपनाई गई। दस्तावेजों में दमयंती सिंह के नाम से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग उठाई गई है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर उठ रहा है। यदि मुकदमे लंबित थे, तो सत्यापन प्रक्रिया में यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया और लाइसेंस कैसे स्वीकृत हो गए। न्यायालय में सुनवाई के दौरान ही लाइसेंस जारी होना कई स्तर पर जांच का विषय बनता है।
करीब दो दशक पुराने इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि मामले की गहराई से जांच की मांग उठेगी और उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। वहीं जिला प्रशासन में सभी दस्तावेजों को पलटना शुरू कर दिया है।

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