36 C
Lucknow
Thursday, April 2, 2026

एवरेस्ट रेस्क्यू घोटाले का खुलासा: पर्यटकों को बीमार बनाकर हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के नाम पर करोड़ों की ठगी

Must read

काठमांडू
नेपाल में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने पर्यटन और एडवेंचर इंडस्ट्री पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पर्यटकों को जानबूझकर बीमार बनाकर महंगे हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के जरिए बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूले जा रहे थे।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संगठित गिरोह शेरपा, ट्रेकिंग एजेंसियों, हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों और अस्पताल से जुड़े लोगों की मिलीभगत से चल रहा था। इस पूरे नेटवर्क ने मिलकर वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों को निशाना बनाया।

नेपाल पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 32 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों में ट्रेकिंग कंपनियों के मालिक, हेलिकॉप्टर सेवाओं से जुड़े अधिकारी और चिकित्सा संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा या विशेष दवाएं मिलाई जाती थीं, जिससे उन्हें उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती थीं। ये लक्षण ऊंचाई पर होने वाली बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) जैसे दिखते थे।

कुछ मामलों में ‘डायमॉक्स’ जैसी दवाओं के साथ ज्यादा पानी पिलाकर भी ऐसे लक्षण पैदा किए जाते थे, जिससे पर्यटक गंभीर रूप से बीमार प्रतीत हों और तत्काल रेस्क्यू की जरूरत लगे।

जब पर्यटक बीमार हो जाते थे, तो उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू कराने के लिए दबाव डाला जाता था। पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर रेस्क्यू बेहद महंगा होता है, जिसकी लागत 2.5 लाख से 6 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।

इसके बाद फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और फ्लाइट रिकॉर्ड तैयार कर बीमा कंपनियों से मोटी रकम वसूली जाती थी। कई मामलों में एक ही हेलिकॉप्टर उड़ान को अलग-अलग यात्रियों के नाम से कई गुना ज्यादा दिखाकर क्लेम किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पतालों में नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे और वरिष्ठ डॉक्टरों के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल बिना उनकी जानकारी के किया जाता था। कई बार मरीजों को भर्ती दिखाया गया, जबकि वे अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे।

इस घोटाले में नेपाल की कुछ प्रमुख रेस्क्यू और ट्रेकिंग कंपनियों के शामिल होने के आरोप लगे हैं। शुरुआती कार्रवाई में तीन बड़ी कंपनियों के छह अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे घोटाले के जरिए करीब 19.69 मिलियन डॉलर (लगभग 188 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की गई। एक कंपनी पर अकेले 10 मिलियन डॉलर से अधिक की फर्जी वसूली का आरोप है।

यह घोटाला कोई नया नहीं है। पहली बार 2018 में इस तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने जांच कर नियमों में बदलाव भी किए थे। बावजूद इसके, हालिया जांच में पता चला कि यह अवैध गतिविधियां जारी रहीं और और भी बड़े स्तर पर फैल गईं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article