मथुरा। नौहझील क्षेत्र के कस्बा बाजना को नगर पंचायत का दर्जा मिले करीब पांच दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका। यमुना एक्सप्रेस-वे के नजदीक स्थित इस कस्बे के हजारों लोगों को रोजाना सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
बाजना कस्बे से लगभग पांच दर्जन छोटे-बड़े गांव जुड़े हुए हैं। इन गांवों से बड़ी संख्या में छात्र, मजदूर और नौकरीपेशा लोग प्रतिदिन मथुरा, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, पलवल, बल्लभगढ़ और फरीदाबाद जैसे शहरों की यात्रा करते हैं। बस अड्डा न होने के कारण यात्रियों को खुले में सड़क किनारे खड़े रहना पड़ता है।
सीधी रोडवेज बस सेवा के अभाव में लोगों को अक्सर निजी और डग्गेमार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इन वाहनों में कई बार क्षमता से अधिक यात्री बैठा लिए जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बा लंबे समय से बस स्टैंड की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि बस स्टैंड बनने से आसपास के गांवों के हजारों लोगों को राहत मिलेगी और आवागमन की व्यवस्था भी बेहतर होगी।
रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मदन मोहन शर्मा का कहना है कि यदि नगर पंचायत की ओर से बस स्टैंड के लिए भूमि का प्रस्ताव भेजा जाता है तो उसे शासन और परिवहन निगम को भेजकर आगे की अनुमति प्राप्त की जाएगी।
वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष सुभाष चौधरी का कहना है कि कस्बे में बस स्टैंड निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश की जा रही है। जमीन उपलब्ध होते ही प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभागों को भेजा जाएगा, ताकि जल्द से जल्द बस अड्डे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सके।


