जिला कोर्ट की सख्ती, बिल्डर व अभय कुमार न्यायिक हिरासत में
नोएडा। इंजीनियर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब पुलिस जांच का दायरा और व्यापक होगा। नोएडा की जिला अदालत ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए गहन जांच के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) संजीव कुमार त्रिपाठी ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लापरवाही के संकेत मिल रहे हैं।
कोर्ट ने मामले में नामजद बिल्डर को 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अभय कुमार को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अदालत ने कहा कि मामले की तह तक जाने के लिए हर पहलू की निष्पक्ष और गंभीरता से जांच जरूरी है।
विभागों की भूमिका पर भी सवाल
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में कई विभागों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। कोर्ट ने संबंधित विभागों की कार्यशैली और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। जांच एजेंसियों को आदेश दिया गया है कि यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन अधिकारियों की लापरवाही या उदासीनता के कारण हालात इस स्तर तक पहुंचे।
कोर्ट की टिप्पणी में एक गंभीर पहलू यह भी सामने आया है कि विधायक और सांसद द्वारा की गई शिकायतों को सतीश पाल द्वारा दबाए जाने की बात कही गई है। अदालत ने इस बिंदु को बेहद गंभीर मानते हुए इसकी भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सीजेएम ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और शिकायतों की जांच की जाए
यह पता लगाया जाए कि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की जवाबदेही तय की जाए
अदालत की सख्ती के बाद यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा खुलासे हो सकते हैं। इंजीनियर की मौत को लेकर अब यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही की बड़ी जांच का रूप लेता नजर आ रहा है।





