प्रयागराज के संविलियन विद्यालय में बच्चों से पेड़ तुड़वाने का आरोप
प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर प्रश्न
प्रयागराज: केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान—जो मिशन लाइफ के अंतर्गत मातृत्व, मातृभूमि और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है—आज एक विवाद के केंद्र में आ गया है। इस अभियान के जरिए देशभर में स्कूलों, कॉलेजों और नागरिकों को पेड़ लगाकर उनकी देखभाल का संकल्प दिलाया जा रहा है।
इसी अभियान की भावना के विपरीत संविलियन विद्यालय मैनापुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय की प्रधानाचार्या विनीता शिवहरे के निर्देश पर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से परिसर में लगे पेड़ों की डालियाँ तुड़वाने, काटने और छांटने का कार्य कराया गया। यह घटना न केवल पर्यावरणीय मूल्यों के विरुद्ध बताई जा रही है, बल्कि शिक्षा के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े करती है।
प्रचलित नियमों के अनुसार पाँच वर्ष से अधिक आयु के हरे पेड़ों को बिना सक्षम अनुमति नुकसान पहुँचाना दंडनीय है। आरोप है कि इस मामले में न तो वन विभाग से अनुमति ली गई और न ही किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति। यह दावा विद्यालय के कुछ शिक्षकों द्वारा किया गया है।
एसएमसी की सहमति नहीं
विद्यालय की शिक्षिका प्राची सक्सेना के अनुसार, इस विषय पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था और न ही उच्च अधिकारियों से अनुमति ली गई। इसके बावजूद फलदार वृक्षों की छंटाई/तोड़फोड़ बच्चों से कराई गई—जो बाल सुरक्षा और बाल अधिकारों के दृष्टिकोण से भी गंभीर चिंता का विषय बताया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ के तहत रिकॉर्ड वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है। ऐसे में सरकारी विद्यालय परिसर में बच्चों से पेड़ तुड़वाने के आरोप इस अभियान की आत्मा पर सीधा प्रहार प्रतीत होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण और बाल अधिकारों पर लगातार ज़ोर देने वाली सरकार के लिए यह मामला एक कसौटी बन गया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक स्पष्ट कार्रवाई या जवाब न आना नीति और नीयत—दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदारों पर जांच और कार्रवाई होती है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


