प्रकाश शर्मा
अमेरिका इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध के 13 दिन बीत चुके है। इस युद्ध में रूस ने स्पष्ट रूप से ईरान का पक्ष लिया और ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मृत्यु पर शोक जताया और नये सुप्रीम लीडर बने खामनेई के पुत्र को बधाई देकर साथ देने का वायदा किया।इसी तरह चीन ने ईरान का पक्ष लिया और ईरान को हथियारों की सप्लाई दी।
140 करोड़ वाला भारत देश आज कहां खडा है इसका मूल्यांकन जरूरी है। ईरान लम्बे समय से भारत का सहयोगी रहा और आड़े वक्त में साथ भी दिया लेकिन जबसे अमेरिका इजराइल ने ईरान पर हमला बोला है भारत सरकार की ओर से कोई ऐसा बयान या प्रधानमंत्री द्वारा कोई ऐसा वक्तव्य नही आया है जिससे यह पता चले कि आखिर भारत की क्या भूमिका है।
सरकार के मंत्री यह अवश्य कह रहे है कि दुनिया के तमाम देशो के राष्ट्राध्यक्षो से प्रधानमंत्री ने बात की है और युद्ध के बाद उत्पन्न तेल और गैस संकट से निपटने कि लिए वैकल्पिक प्रयास किये जा रहे है। यहाँ सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि ईरान नेवी का एक जहाज श्रीलंका के पास अमेरिका ने हमला करके डुबो दिया।लेकिन भारत सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नही दी।
भारत को अमेरिका निर्देश दे रहा है लिखत पढत में कि रूस से इतना तेल खरीदना होगा। पहले पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया था लेकिन भारत सरकार चुप रही। ऐसा लगता है कि भारत सरकार एपास्टिन फाइल से डरी हुई है और अमेरिका अपने हिसाब से नचा रहा हैं।
अमेरिका पर बोलने के बजाय केन्द्र सरकार के मंत्री व खुद प्रधानमंत्री विपक्ष को कोस रहे हैं। भारत के शान्त रहने के कारण अमेरिका की दादागीरी बढती जा रही है। पहले एक राष्ट्रध्यक्ष को बेडरूम से पत्नी सहित उठाया। उसके बाद हमला करके ईरान के सुप्रीम लीड़र सहित तमाम नेताओ का मौत के घाट उतार दिया। सैकडों स्कूली बच्चे मार दिये गये उनका क्या कसूर थालेकिन भारत सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नही दी।
आज पूरी दुनिया को अमेरिका और इजराइल ने संकट में डाल दिया है। ऐसे में भारत सरकार को अपनी भूमिका अदा करनी चाहिए क्योकि भारत 140 करोड जनसंख्या का देश है और भारत ने हमेशा अपनी भूमिका अदा की है लेकिन आज भारत की सभी पक्षों मैं तत्काल युद्ध बन्द करने की अपील करके रूस के साथ मिलकर दबाव बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि दुनिया शांति से रह सके।


