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Monday, March 23, 2026

कालिदास मार्ग से हटकर ‘पाठक’ के द्वार पहुंचेगी सत्ता की धमक, पहली बार डिप्टी सीएम आवास पर ‘कोर’ मंथन?

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लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम और प्रतीकात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब तक मुख्यमंत्री आवास 5-कालिदास मार्ग पर होने वाली भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण ‘कोर कमेटी’ की बैठक इस बार डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर आयोजित की जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को सियासी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सहित भाजपा और संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
पहली बार बदला बैठक का स्थान, कई मायने निकाले जा रहे
अब तक भाजपा की कोर कमेटी की बैठकें परंपरागत रूप से मुख्यमंत्री आवास या पार्टी मुख्यालय पर होती रही हैं। ऐसे में पहली बार डिप्टी सीएम के आवास पर इस स्तर की बैठक होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञ इसे भाजपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन और सामूहिक नेतृत्व के संदेश के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के साथ-साथ विभिन्न शीर्ष नेताओं की भूमिका को भी उभारना चाहता है।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति तय करना है। बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है—
प्रदेश और जिला स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल
लंबित राजनीतिक नियुक्तियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना
पंचायत चुनावों के मद्देनजर सामाजिक समीकरण साधना
कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना
बताया जा रहा है कि पार्टी ने संगठन विस्तार के लिए तय समयसीमा के भीतर नई टीमों के गठन पर भी जोर दिया है।
हाल ही में हुई समन्वय बैठक में संघ की ओर से मंत्रियों और विधायकों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई गई थी। इसके बाद भाजपा नेतृत्व एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर इस स्तर की बैठक का आयोजन उनके बढ़ते राजनीतिक कद की ओर भी इशारा करता है। यह संकेत माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व उन्हें संगठन और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।
डिप्टी सीएम आवास पर कोर कमेटी की बैठक केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। भाजपा 2027 के चुनाव से पहले संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और सामूहिक नेतृत्व को सामने लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
अब देखने वाली बात होगी कि यह बदलाव सिर्फ प्रतीकात्मक रहता है या आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में शक्ति संतुलन पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है।

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