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Wednesday, February 11, 2026

डीएससी महंगी हुई, कंपनी रजिस्ट्रेशन की फीस सस्ती

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निजी कंपनी कमा रहीं मोटा मुनाफा, आम जनमानस उलझा राजनैतिक और धार्मिक बहस मे

लखनऊ।डिजिटल इंडिया के दौर में डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) अब कंपनी रजिस्ट्रेशन, जीएसटी, आयकर, ई-टेंडर और न्यायालयी कार्यों के लिए अनिवार्य हो चुका है। लेकिन हाल के महीनों में डीएससी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी को लेकर व्यापारियों, स्टार्टअप और युवाओं में असमंजस बना हुआ है।आम जनमानस राजनैतिक और धार्मिक बहस मे ही उलझा रहता, और चंद लोग दिमाग़ का इस्तेमाल कर दिन रात बढ़ रहे।यूथ इंडिया की इस रिपोर्ट में डीएससी महंगी होने के कारणों और कंपनी बनाने की फीस से जुड़ी पूरी जानकारी दी जा रही है।

सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत सरकार डीएससी सीधे नहीं बेचती। सरकार के अधीन कार्यरत कंट्रोलर ऑफ़ सर्टिफायिंग अथॉरिटीज (CCA) केवल नियम तय करता है और लाइसेंस जारी करता है। डीएससी का विक्रय लाइसेंस प्राप्त निजी कंपनियां (सर्टिफायिंग अथॉरिटीज) करती हैं।

हालिया मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण सुरक्षा मानकों का सख्त होना भी बताया गया है। डीएससी महंगी होने के मुख्य कारण लाइव वीडियो KYC और फेस वेरिफिकेशन अनिवार्य होना, आधार-पैन का क्रॉस वेरिफिकेशन हाई-सिक्योरिटी FIPS प्रमाणित USB टोकन, डीएससी की वैधता 3 साल से घटाकर 1–2 साल क़र दी गई वहीं फर्जी टेंडर और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के कारण बताये गए है।

लाइसेंसधारी कंपनियों की संख्या घटकर 8 रहना, भी ये बताता है कि कुछ लोगों का ही इस ओर अधिपत्य है वहीं पहले ₹500 से ₹900 फीस थी,अब ₹1,200 से ₹3,000 (USB टोकन अलग) है।

भारत में कुल 8 अधिकृत सर्टिफायिंग अथॉरिटीज हैं—एक सरकारी क्षेत्र से जुड़ी,सात निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हैं। जिनमे

e-Mudhra, Sify, NSDL e-Governance, Capricorn CA, Pantasign, IDSign, VSign/कोडिज़ाइन शामिल हैं। कंपनी रजिस्ट्रेशन का काम कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के अंतर्गत होता है।प्राइवेट लिमिटेड कंपनी: ₹6,000 – ₹12,000,LLP: ₹4,000 – ₹8,000, OPC (वन पर्सन कंपनी): ₹5,000 – ₹10,000 मे बनती हैँ। कंपनी बनानें मे अब न्यूनतम पूंजी की बाध्यता समाप्त हो चुकी है और घर के पते पर भी कंपनी रजिस्टर कराई जा सकती है।इसके लिए

जरूरी दस्तावेज मात्र आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, मोबाइल, ई-मेल, एड्रेस प्रूफ, डीएससी और डिन हैँ।

बता दें कि,डीएससी की बढ़ी कीमतें किसी सरकारी टैक्स वृद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताई गईं हैं। वहीं कंपनी बनाना अब पहले से ज्यादा आसान और किफायती हो गया है।लेकिन डीएससी की बढ़ी कीमतें खुब जेब खाली कर रहीं। सुरक्षित डिजिटल सिस्टम देश की जरूरत है, लेकिन इसके साथ आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों पर बोझ न बढ़े—यह भी उतना ही जरूरी है। लेकिन इस ओर अभी तक किसी विपक्षी दल नें आवाज नहीं उठाई है।

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