मस्कट: खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच ओमान के सलालाह बंदरगाह पर बड़ा ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में बंदरगाह पर मौजूद तेल भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि यह हमला पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ड्रोन हमले के कारण बंदरगाह के तेल स्टोरेज टैंकों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अब तक किसी बड़े जहाज को नुकसान होने की पुष्टि नहीं हुई है। बंदरगाह के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और घटनास्थल पर जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ड्रोन हमलों ने सलालाह पोर्ट के तेल भंडारण केंद्रों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे ने भी इस हमले की पुष्टि की है और कहा है कि यह घटना क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत है।
हालांकि राहत की बात यह है कि इस हमले में किसी भी व्यापारिक जहाज को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है। बंदरगाह से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर फिलहाल नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
इस घटना के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सैद ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से संपर्क कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सुल्तान ने स्पष्ट किया कि ओमान की भूमि पर इस तरह की सैन्य गतिविधियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
सुल्तान ने यह भी कहा कि ओमान किसी भी युद्ध का पक्षकार नहीं है और वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
गौरतलब है कि ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच कई बार बातचीत की पहल भी ओमान की मध्यस्थता से हुई थी।
लेकिन हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ओमान की मध्यस्थता की कोशिशों को झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सलालाह बंदरगाह पर हमला इस कूटनीतिक प्रयास को और कमजोर कर सकता है।
इधर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के अनुसार तीन व्यापारिक जहाजों को अज्ञात वस्तुओं से निशाना बनाया गया है।
यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर बड़ा असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है और क्षेत्र में स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।


